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ओवरथिंकिंग करते हैं तो हो जाएं सावधान! युवा पीढ़ी पर बढ़ा साइड इफेक्ट का खतरा

Overthinking Effects: पढ़ाई, कॅरियर और आर्थिक स्थिरता की चिंता की वजह से युवा पीढ़ी अंतहीन भुलभुलैया में फंसकर हर रात 28 मिनट नींद खो रही है।

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May 03, 2026
सोच का बोझ: हर रात 28 मिनट की नींद खो रहे, पढ़ाई, कॅरियर, आर्थिक स्थिरता की चिंता (AI जनरेटेड इमेज)

Anxiety-Stress Overthinking Effects: दिनभर की भागदौड़ के बाद शरीर विश्राम चाहता है, लेकिन दिमाग नहीं। क्यों हुआ, कैसे हुआ, अब क्या होगा? जैसे सवाल रह-रहकर मस्तिष्क की दीवारों से टकराते रहते हैं। यह उस युवा पीढ़ी का सच है, जो विचारों की अंतहीन भुलभुलैया में फंसकर नींद और सुख-चैन खो रही है। आज के डिजिटल युग में युवा ऐसे अदृश्य उलझन और मनोवैज्ञानिक दबाव के नीचे जी रहे हैं, जिसे ‘ओवरथिंकिंग’ कहा जाता है। एक ऐसी स्थिति जहां विचार सुलझने के बजाय और अधिक उलझते चले जाते हैं।

‘ग्लोबल ओवरथिंकिंग इंडेक्स' रिपोर्ट के अनुसार, लोग रोज औसतन 89 मिनट सिर्फ सोचने में बिता रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी नींद, काम और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वैश्विक स्तर पर लोग हर रात औसतन 27.9 मिनट की नींद सिर्फ सोचने में खो रहे हैं। साल के 365 दिनों में से 22 दिन इसी में खो जाते हैं। हालत ये है कि कल की चिंता और आज की तुलना ने युवाओं के मस्तिष्क को 'क्लाउड स्टोरेज' की तरह भर दिया है, जहां सुकून के लिए जगह ही नहीं बची। वे भविष्य की उन आपदाओं से लड़ रहे हैं, जो शायद कभी आएंगी ही नहीं। स्टैटिस्टा और मेंटर हेल्थ अमरीका के अनुसार, लगभग 73त्न युवा (18-35 वर्ष) स्वीकार करते हैं कि वे नियमित रूप से ओवरथिंकिंग के शिकार होते हैं। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में 10-15% अधिक देखी गई है।

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किस आयु वर्ग के लोग क्या सोचते हैं?

25-35 वर्ष : कॅरियर, रिश्ते और भविष्य की अनिश्चितता (73% पर असर)
45-55 वर्ष : आर्थिक स्थिरता, जिम्मेदारियों का दबाव (52 % पर असर)
60 वर्ष : स्वास्थ्य और जीवन के फैसलों को लेकर चिंता (20 % पर असर
(टॉकीएट्री.कॉम के अनुसार)

कितना सोच रही दुनिया ?

रोज: 89 मिनट ओवरथिंकिंग
हफ्ते में: 10 घंटे
साल में: करीब 22 दिन

कहां, कितनी ओवरथिंकिंग

देशप्रतिशत (%)
साउथ अफ्रीका79%
पोलैंड71%
ग्रीस70%
मेक्सिको68%
पुर्तगाल67%
नीदरलैंड्स60%
ब्राजील60%
भारत57%

क्यों बढ़ रही है ओवरथिंकिंग?

कॅरियर और आर्थिक असुरक्षा
सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना
भविष्य को लेकर अनिश्चितता
अतीत की गलतियों का दबाव
नींद और जीवनशैली में असंतुलन

ओवरथिंकिंग के साइड इफेक्ट

-अनिद्रा और खराब नींद
-चिंता और अवसाद
-निर्णय लेने में कठिनाई
-आत्मविश्वास में कमी
-सिरदर्द और थकान

क्या करें?

माइंडफुलनेस और मेडिटेशन: वर्तमान में रहने की आदत डालें
रूटीन बनाएं: दिनचर्या को व्यवस्थित रखें
डिजिटल डिटॉक्स: स्क्रीनटाइम सीमित करें
जर्नलिंग: अपने विचार लिखें, इससे मन हल्का होता है
फिजिकल एक्टिविटी: व्यायाम तनाव कम करता है
प्रोफेशनल मदद: जरूरत हो तो काउंसलर से संपर्क करें

-दुनिया में 28 करोड़ लोग डिपे्रशन और 30 करोड़ से ज्यादा एंग्जायटी से प्रभावित हैं, जिसकी प्रमुख वजह ओवरथिंकिंग है।
-लगातार ओवरथिंकिंग करने वालों में डिप्रेशन का जोखिम 2-3 गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
(विश्व स्वास्थ्य संगठन)

ध्यान और योग लाभकारी

ओवरथिंकिंग चित्त की अस्थिरता है। योग और ध्यान 'प्राण' को संतुलित कर मन के भटकाव को रोकते हैं। प्राणायाम मस्तिष्क के 'प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स' को सक्रिय करता है, जिससे विचारों का चक्रवात शांत होता है। जब हम वर्तमान क्षण में सांसों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मन भविष्य की चिंता छोड़ शांति का अनुभव करता है। ओंकार ध्यान, योग निद्रा और त्राटक करें, जिससे चित्त शांत और स्थिर होगा।

स्क्रीनटाइम भी बड़ा कारण

डिजिटल दुनिया ने ओवरथिंकिंग को और तेज किया है। भारत में औसत स्क्रीनटाइम 6-7 घंटे प्रतिदिन तक पहुंच चुका है। अध्ययनों के अनुसार, जो लोग रोज़ 5 घंटे से अधिक स्क्रीन देखते हैं, उनमें चिंता और ओवरथिंकिंग के लक्षण 40त्न तक अधिक पाए जाते हैं।

मानव मस्तिष्क स्वाभाविक रूप से नकारात्मक संभावनाओं पर अधिक ध्यान देता है, जिससे ओवरथिंकिंग की प्रवृत्ति बढ़ती है।
-डैनियल कहेनमन, मनोविज्ञान के नोबेल विजेता

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Updated on:
03 May 2026 05:54 am
Published on:
03 May 2026 05:53 am
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