असामान्य पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत सहित कई राज्यों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी हुई। तापमान में 10-15 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश में मौसम का असर दिखा, वहीं फसलों को नुकसान और जनजीवन प्रभावित हुआ।
Weather Update: मजबूत व असामान्य पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन उत्तर से दक्षिण और पश्चिम से पूर्व और पूर्वोत्तर के राज्यों तक मध्यम स्तर से लेकर भारी बारिश दर्ज की गई। हिमालयी रेंज में बर्फबारी का दौर जारी है। इसके चलते गर्मी के तेवर पर ब्रेक लग गया और मौसम में ठंडक घुल गई है। राजस्थान में कई स्थानों पर बारिश व कुछ जगहों पर ओलावृष्टि का दौर जारी रहा। शुक्रवार को राजधानी जयपुर, कोटा, सीकर सहित कई क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ बारिश हुई। कुछ स्थानों पर तापमान में 10 डिग्री तक गिरावट आई है। दिल्ली-एनसीआर में सुबह से बारिश शुरू हुई, सड़कें फिसलन भरी हो गईं। बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज हुईं। पंजाब में अचानक तेज बारिश और कोहरा देखा गया, जबकि लखनऊ में गरज के साथ छींटे पड़े।
मौसम विभाग के अनुसार इस बार का पश्चिमी विक्षोभ की संरचना असामान्य दिखी। जो 1,000 किलोमीटर लंबी सीधी ट्रफ (निम्न दबाव रेखा) में अफगानिस्तान से पाकिस्तान होते हुए भारत में पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ी। सामान्य विक्षोभ घुमावदार होते हैं, लेकिन यह सीधे और मजबूत लाइन में है। इससे उत्तर-पश्चिम से लेकर पूर्वी भागों तक तीव्र गरज-चमक व तेज हवाओं के साथ मौसम तूफानी बन गया। मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया ने कहा कि उत्तर भारत में एक दिन के लिए हल्की सर्दी वापस आ गई है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिकतम तापमान 16-22 डिग्री रहने की बात कही, जो सामान्य से 10-15 डिग्री कम है। आइएमडी के अनुसार देश के कई हिस्साें में बड़े पैमाने पर आंधी-तूफान की गतिविधि व पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले एक सप्ताह के दौरान दिन का तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है। उत्तरी भारत में बदले हुए मौसम का असर 27 मार्च तक रहेगा। इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे क्रमिक बढ़ोतरी होगी।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शुक्रवार को 15 साल बाद गर्मी के दिनों ठंडक का अहसास वाला मौसम देखा गया। प्रदेश के 42 जिलों में बारिश दर्ज की गई, जबकि 13 जिलों में ओलावृष्टि होने से खेतों में खड़ी व कटी हुई फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासतौर पर गेहूं और चना की फसलें प्रभावित हुई है। कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि होने से पेड़ों के गिरने और बिजली आपूर्ति ठप होने का नुकसान भी हुआ।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश व ऊंची चोटियों पर भारी बर्फबारी के बीच शुक्रवार को त्रिलोकनाथ जीरो पॉइंट से करीब डेढ़ किलोमीटर आगे वामतट की पहाड़ी से हिमखंड चिनाब नदी पर गिर गया। इससे नदी का बहाव तेज हो गया। इससे तीन एनएच मनाली-केलांग, आनी कुल्लू और रामपुर-किन्नौर समेत 100 सड़कों पर यातायात बाधित हो गया। अटल-टनल रोहतांग मार्ग, आनी-कुल्लू जलोड़ी जोत में 45 सेंटीमीटर बर्फबारी होने से बंद है। जबकि रामपुर-किन्नौर एनएच नाथपा में पहाड़ी दरकने से बंद हो गया है।