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नाव पर इफ्तार मामले में 14 लोगों की गिरफ्तारी पर आया Asaduddin Owaisi का बयान, कहा- “गंगा में गिरने वाला सीवेज…”

वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार करने वाले 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी से विवाद बढ़ा। ओवैसी ने कार्रवाई को भेदभावपूर्ण बताया, जबकि पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत होने और प्रदूषण के आरोपों में केस दर्ज कर जांच शुरू की है।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 21, 2026

Asaduddin Owaisi

Asaduddin Owaisi

Asaduddin Owaisi On Varanasi Ganga Iftaar Issue: गंगा नदी में नाव पर बैठकर इफ्तार करने वाले 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पूरा मामला एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ। इस वीडियो में कुछ युवक गंगा के बीच नाव पर बैठे नजर आते हैं। वे रोजा खोल रहे थे और साथ में खाना खा रहे थे, जिसमें चिकन बिरयानी भी शामिल बताई जा रही है। वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर फैला, लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।

क्या है पूरा मामला?


भाजपा युवा मोर्चा के एक स्थानीय पदाधिकारी की शिकायत के आधार पर कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि गंगा जैसी पवित्र नदी में मांसाहारी भोजन करना और उसके अवशेष पानी में डालना हिंदू आस्था के खिलाफ है। इसी आधार पर पुलिस ने 14 युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों पर कई धाराएं लगाई गई हैं। इनमें धार्मिक भावनाएं आहत करने, पूजा स्थल को अपवित्र करने, आपसी सौहार्द बिगाड़ने और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। साथ ही जल प्रदूषण से जुड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई हो सकती है।

Asaduddin Owaisi ने क्या कहा?


इस पूरे घटनाक्रम पर अब राजनीति भी तेज हो गई है। एआईएमआईएम(AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नाव पर बैठकर खाना खाने से आखिर किसकी भावनाएं आहत हो रही हैं। उन्होंने यह भी तंज कसा कि गंगा में रोजाना गिरने वाला गंदा पानी(सीवेज का पानी) क्या किसी को परेशान नहीं करता।ओवैसी ने यह भी कहा कि गिरफ्तार युवकों का “कसूर सिर्फ इतना है कि वे मुसलमान हैं।” उन्होंने रमजान के दौरान शराब की दुकानों के खुले रहने का मुद्दा भी उठाया और पूछा कि क्या उससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएं आहत नहीं होतीं।

अब यह मामला सिर्फ एक वीडियो या स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रह गया है। यह कानून, आस्था और समानता जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। एक तरफ धार्मिक संवेदनाओं की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ कार्रवाई के तरीके और उसके पीछे के इरादों पर भी बहस छिड़ गई है।