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India China Relations: चीन के साथ रिश्तों पर भारत का साफ संदेश, सीमा पर शांति के बिना नहीं बनेगी बात

S Jaishankar China: भारत और चीन के बीच संपर्कों की बहाली ने रिश्तों में नरमी के संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन नई दिल्ली इसे पूर्ण सामान्य स्थिति नहीं मान रही। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के ताजा बयान से साफ है कि आगे की दिशा सीमा पर स्थिरता और भरोसे की बहाली से तय होगी।
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Sep 29, 2026
India China Relations
India China Relations : भारत-चीन रिश्तों पर जयशंकर का बड़ा संकेत : (फोटो सोर्स:X/@DrSJaishankar)

India China Border: भारत-चीन रिश्तों में बीते कुछ समय में जमी बर्फ पिघलने के संकेत मिले हैं, लेकिन नई दिल्ली इसे मंजिल नहीं, बल्कि एक शुरुआती कदम मान रही है। न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच उड़ानों, अधिकारियों की आवाजाही और अन्य संपर्कों का लौटना सकारात्मक जरूर है, मगर रिश्तों की वास्तविक स्थिति का पैमाना सीमा पर शांति ही रहेगी। यही वजह है कि आने वाले दिनों में सीमा पर घटनाक्रम दोनों देशों की कूटनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-चीन संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते उस कठिन दौर से आगे बढ़े हैं, जो 2020 के बाद सीमा पर पैदा हुए तनाव के कारण आया था। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि संपर्क बढ़ने या कुछ व्यवस्थाओं के दोबारा शुरू होने को रिश्तों में बड़े रणनीतिक बदलाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

जयशंकर के मुताबिक, 2025 की तुलना में मौजूदा स्थिति बेहतर है और 2024 के मुकाबले भी सुधार अधिक दिखाई देता है। लेकिन इस सकारात्मक बदलाव की स्थायित्व सीमा पर परिस्थितियों से जुड़ी रहेगी। उनके अनुसार, सीमा पर तनाव और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ लंबे समय तक नहीं चल सकते।

संपर्क लौटे, लेकिन तस्वीर अभी अधूरी

2020 के घटनाक्रम के बाद भारत और चीन के बीच राजनयिक संवाद, अधिकारियों की आवाजाही, वीजा सुविधाओं और हवाई संपर्क पर असर पड़ा था। दूसरी ओर, दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हुईं।

अब तनाव में कमी के साथ कुछ पुराने संपर्कों की वापसी हो रही है। जयशंकर ने इसे रिश्तों में स्थिरता आने का स्वाभाविक परिणाम बताया, न कि सभी विवादों के समाप्त होने का संकेत।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच तनाव बने रहना किसी के हित में नहीं है। भारत का प्रयास अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशने का है।

सीमा क्यों बनी सबसे बड़ी कसौटी?

भारत और चीन के बीच लंबी और विवादित सीमा का प्रश्न दशकों से संवेदनशील रहा है। जून 2020 की गलवान घाटी झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर झटका दिया था। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लंबे दौर की बातचीत चली।

जयशंकर ने इसी पृष्ठभूमि में संकेत दिया कि रिश्तों की गति सीमा पर वास्तविक शांति से जुड़ी है। यदि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता मजबूत होती है, तो व्यापार, आवागमन और लोगों के बीच संपर्क जैसे दूसरे क्षेत्रों में भी सामान्य स्थिति बनाने की गुंजाइश बढ़ सकती है।

भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति

विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि चीन के साथ बेहतर संबंध भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। नई दिल्ली एक साथ अमेरिका, यूरोप, जापान, रूस और अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ संबंधों को आगे बढ़ा रही है।

ऐसे में भारत-चीन रिश्तों में सुधार का अर्थ केवल द्विपक्षीय संपर्क बढ़ना नहीं, बल्कि एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति और उसके व्यापक विदेश नीति विकल्पों से भी जुड़ा है।

Updated on:
29 Sept 2026 09:43 am
Published on:
29 Sept 2026 09:11 am