राष्ट्रीय

पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, विदेश भेजे जाने वाले तेल पर बढ़ा टैक्स, सिर्फ 6 देशों को छूट

Petrol-Diesel Export Tax: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है। हालांकि नेपाल समेत छह देशों को छूट भी दी है। चलिए जानते हैं… अब पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर कितना टैक्स लगेगा।
2 min read
Jun 30, 2026
Petrol Diesel
Petrol Diesel: पेट्रोल-डीजल (photo-patrika)

Petrol-Diesel Export Tax Update: पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोल-डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस फैसले का असर फिलहाल घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा एक्साइज ड्यूटी पर नहीं पड़ेगा। यानी कि देश के भीतर ईंधन पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं सरकार ने पड़ोसी देशों को भी इस नई ड्यूटी से छूट दी है। इन 6 देशों के नाम हैं- नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका, मॉरीशस और मालदीव।

पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी

बता दें पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 4 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी बढ़ा है। वहीं डीजल के एक्सपोर्ट पर 8.5 रुपये प्रति लीटर और ATF के एक्सपोर्ट पर 7.5 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा है।

सरकार ने देश में पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी की है। अब पेट्रोल पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स (एक्सपोर्ट ड्यूटी) 1.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों को नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर पहले से ही निर्यात शुल्क में छूट मिल रही थी। अब इस छूट का दायरा बढ़ाते हुए मॉरीशस और मालदीव को होने वाले सरकारी तेल कंपनियों के निर्यात को भी इसमें शामिल कर लिया गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपने हालिया उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल से काफी नीचे आ गई हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट के सामान्य रूप से खुलने के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति फिर से स्थिर हो गई है।

होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही दोबारा सामान्य होने से लंबी अवधि तक तेल आपूर्ति बाधित रहने की आशंका भी कम हुई है। इसी वजह से कच्चे तेल के दाम उस स्तर के करीब लौट आए हैं, जहां वे ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से पहले थे।

Updated on:
01 Jul 2026 12:28 am
Published on:
30 Jun 2026 09:49 pm