राष्ट्रीय

एआई के एडवांस इस्तेमाल में भारत काफी आगे, पर छोटे शहरों में ‘सन्नाटा’

एआई के एडवांस इस्तेमाल में भारत काफी आगे है, लेकिन इसके इस्तेमाल के मामले में बड़े शहरों की तुलना में छोटे शहरों में आंकड़ा काफी कम है।
2 min read
Apr 16, 2026
AI
AI

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - Artificial Intelligence) का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। कई सेक्टर्स में एआई अब अहम हिस्सा बन गया है। लोग नौकरी से लेकर अपनी निजी ज़िंदगी में भी एआई का इस्तेमाल करते हैं। भारत (India) भी ऐसे देशों में शामिल है जहाँ एआई का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है। ओपनएआई (OpenAI) की ताज़ा रिपोर्ट ने भारत को दुनिया के सबसे उन्नत एआई उपयोगकर्ता देशों की लिस्ट में शामिल किया है।

टॉप 5 देशों में शामिल भारत

ओपनएआई की रिपोर्ट के अनुसार एआई का इस्तेमाल करते हुए 'थिंकिंग कैपेबिलिटी' और जटिल समस्याओं को सुलझाने के मामले में भारत दुनिया के टॉप 5 देशों में शुमार है। लिस्ट में भारत का दूसरा स्थान है।

एआई का असमान वितरण

ओपनएआई की रिपोर्ट से साफ है कि भारत तकनीकी रूप से सक्षम है और देश में एआई का एडवांस इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन इसके बावजूद एआई के वितरण में काफी असमानता है।

महानगरों का दबदबा

भारत की एआई क्रांति फिलहाल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और अन्य बड़े शहरों तक सीमित है। देश के 10 बड़े शहर ही कुल 50% एआई इस्तेमाल में भागीदारी देते हैं। डेटा विश्लेषण और कोडिंग जैसे एडवांस कार्यों में बड़े और छोटे शहरों के बीच 30 गुना तक का भारी अंतर देखा गया है।

क्या है एआई के असमान वितरण की वजह?

एआई के असमान वितरण की कई वजहें हैं। बड़े शहरों में बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी और तेज़ ब्रॉडबैंड उपलब्ध है, जबकि छोटे शहरों और कस्बों में इंटरनेट स्पीड धीमी और अस्थिर रहती है। एआई टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए अच्छे स्मार्टफोन या कंप्यूटर और हाई-स्पीड डेटा की जरूरत पड़ती है, जो कई छोटे शहरों में महंगा और कम उपलब्ध होता है। दूसरी बड़ी वजह स्किल डिफरेंस है। बड़े शहरों में आईआईटी, एनआईटी जैसी संस्थाएं और टेक कंपनियाँ हैं, जहाँ लोग कोडिंग, डेटा साइंस और जटिल रीजनिंग सीखते हैं। कई छोटे शहरों में ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम कम हैं और जागरूकता भी सीमित है। इन शहरों में ज़्यादातर लोग एआई को सिर्फ चैटबॉट के रूप में जानते हैं, एडवांस इस्तेमाल (जैसे डेटा एनालिसिस या ऑटोमेशन) से अनजान रहते हैं। तीसरी वजह इकोसिस्टम का प्रभाव है। बेंगलुरु-हैदराबाद जैसे आईटी हब में स्टार्टअप, आईटी कंपनियाँ और टेक जॉब्स भरपूर हैं, जहाँ एआई हर दिन काम में आता है। छोटे शहरों में ज्यादातर पारंपरिक व्यवसाय या सरकारी नौकरियाँ हैं, जहां एआई की ज़रूरत कम महसूस होती है।

Updated on:
16 Apr 2026 09:38 am
Published on:
16 Apr 2026 09:37 am
Also Read
View All
‘गोलीबारी होगी, बदसलूकी और हत्याएं होंगी’, जंतर-मंतर प्रदर्शन पर RSS नेता की विवादित टिप्पणी, केरल सरकार ने दिए जांच के आदेश

CJP प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस ने भेजे नोटिस, कार्रवाई न करने के दावों पर कहा जांच होने तक नहीं रुकेगी प्रक्रिया

NEET-UG Row: राधाकृष्णन समिति की 101 में से 27 सिफारिशें अब तक लागू नहीं, NTA अब भी करा रहा है भर्ती परीक्षाएं

असम और बिहार में छात्रों पर दर्ज केस वापस, CJP की चेतावनी के बाद हरकत में आई सरकार

‘दस साल की सजा, करोड़ों का जुर्माना’, विपक्ष के कड़े विरोध के बाद आज संसद में पेपर लीक रोकने वाले नए बिल पर चर्चा