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एआई की ‘सुनामी’ पर सवारी कर रहा ‘टेक इंडिया’, वैश्विक छंटनी की आंधी में भी भारत से हायरिंग बढ़ी

दुनियाभर में एआई का प्रभाव बढ़ रहा है। एआई की वजह से जहाँ दुनियाभर में छंटनी देखने को मिल रही है, वहीं भारत में इस दौरान भी हायरिंग बढ़ रही हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 28, 2026

AI

AI (Representational Photo)

एआई यानी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI – Artificial Intelligence) का प्रभाव दुनियाभर में तेज़ी से बढ़ रहा है। साथ ही कई सेक्टर्स में इसका इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। दुनिया भर में एआई की वजह से तकनीकी क्षेत्र में मची उथल-पुथल के बीच भारत एक 'सुरक्षित द्वीप' की तरह उभरा है। 2026 की पहली तिमाही में जहाँ वैश्विक स्तर पर 60,000 टेक वर्कर अपनी नौकरी गंवा चुके हैं, वहीं दिग्गज टेक कंपनियाँ भारत (India) में अपनी टीम बढ़ा रही हैं।

एआई को हथियार की तरह कर रहे हैं इस्तेमाल

जहाँ अमेरिका (United States Of America) और यूरोप (Europe) में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को अपनी नौकरियों के लिए एआई से जूझना पड़ रहा है, वहीं भारत में इंजीनियर एआई को हथियार की तरह इस्तेमाल कर अपनी प्रासंगिकता और मांग बढ़ा रहे हैं। H-1B वीज़ा की बढ़ती लागत और अमेरिका में रिस्ट्रक्चरिंग के कारण कंपनियाँ अब अपना पूरा आरएंडडी और इंजीनियरिंग बेस भारत जैसे देशों में शिफ्ट कर रही हैं।

डिजिटल इंडिया और एआई मिशन से मिल रही मदद

भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और एआई मिशन से देश में ट्रेंड को मदद मिल रही है। 2025-26 में एआई स्टार्टअप्स में निवेश लगातार बढ़ा है। टियर-2 शहरों से भी टेक टैलेंट उभर रहा है।

भारत के पक्ष में यह 'गणित'

टेक कंपनियाँ वर्कफोर्स को लो-कास्ट, हाई-स्किल मार्केट की ओर शिफ्ट कर रही हैं और भारत इनमें सबसे आगे हैं। एक अमेरिकी सीनियर इंजीनियर की जहाँ सालाना लागत 2.3 करोड़ रुपए बैठती हैं, वहीं अनु़मानित रूप से भारत में एआई टूल्स सहित एक इंजीनियर 43 लाख रुपए सालाना में काम कर देता है। यानी कंपनियों को 5 गुना बचत मिल रही है। इसी वजह से भारत, फिलीपींस और ब्राज़ील जैसे देश नए टेक हब बन रहे हैं।

दिग्गज कर रहे भारत पर भरोसा

दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियाें मेटा, एमेज़ॉन, ऐप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल का भारत पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है। 2019 में करीब 1 लाख नौकरियों से बढ़कर यह आंकड़ा 2025 में 2.12 लाख तक पहुंच गया। सिर्फ पिछले साल ही 32,000 नई नौकरियाँ जुड़ीं।

भारत में ‘ह्यूमन एआई’ मॉडल

भारत में एआई को अपनाने का मॉडल अलग है। यहाँ एआई इंसानों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उन्हें और सक्षम बना रहा है। इंजीनियर अब एआई-असिस्टेड कोडिंग कर रहे हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स का डिलीवरी टाइम कम हो रहा है और उत्पादकता में में तेज़ उछाल देखा जा रहा है। यह ‘ह्यूमन एआई’ मॉडल भारत को वैश्विक टेक रेस में आगे ले जा रहा है।

इंसान की जरूरत खत्म नहीं होगी

एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई एंट्री-लेवल कोडिंग और टेस्टिंग जैसे बुनियादी कामों को रिप्लेस ज़रूर करेगा, लेकिन मानवीय निर्णय की ज़रूरत खत्म नहीं होगी। हालांकि थ्योरी में 57% काम ऑटोमेट हो सकता है, लेकिन जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए इंसान ज़रूरी हैं।