
Monsoon: देशभर में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है। शनिवार को देश के कई राज्यों में भारी बारिश हुई। जिससे जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया। सड़कों पर पानी भर गया। मुंबई में भारी बारिश के कारण कई जगहों पर लंबा ट्रैफिक भी लग गया। वहीं मौसम विभाग ने अगले कुछ दनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को हल्की से मध्यम बारिश हुई। मौसम विभाग ने अब येलो अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी में 9 जुलाई तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज हवा चल सकती है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई जगह जलभराव, लंबा ट्रैफिक जाम और लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं। मौसम विभाग के रेड अलर्ट जारी करने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी।
बारिश के चलते पेड़ गिरने, मकान और दीवार ढहने जैसी कई घटनाएं सामने आईं। पालघर जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से 6 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि जलभराव वाले इलाकों से 180 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने मजबूत निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण अगले 4 से 5 दिनों तक मध्य भारत में मानसून सक्रिय रहेगा। साथ ही अगले चार दिनों में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात के शेष हिस्सों और उत्तर अरब सागर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है।
मौसम विभाग ने कोंकण, गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, सौराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कई जगहों पर अत्यधिक बारिश की चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक, सोमवार को मंडी और सिरमौर, जबकि मंगलवार को चंबा, कांगड़ा और सिरमौर जिले में बहुत भारी बारिश हो सकती है। विभाग के अनुसार, प्रदेश में 11 जुलाई तक बारिश का दौर जारी रह सकता है।
मौसम विभाग ने महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पंजाब में भी भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि गुजरात के जूनागढ़ में कई इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
केरल में नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ने के कारण प्रशासन ने बाढ़, भूस्खलन और समुद्री कटाव को लेकर चेतावनी जारी की है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र के और मजबूत होने की संभावना के चलते ओडिशा और पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बना हुआ है।