India's Green Energy: भारत की हरित उर्जा को चीन जैसा सुपर ग्रिड चाहिए। क्या है इसकी वजह? आइए नज़र डालते हैं।
भारत (India) की लगातार बढ़ती बिजली की मांग और इसकी आपूर्ति के लिए तैयार हो रही ग्रीन एनर्जी (Green Energy) क्षमता की राह में एक बड़ी बाधा है ट्रांसमिशन नेटवर्क। इसकी कमी के चलते सौर ऊर्जा पार्कों में बिजली उत्पादन में कटौती भी करनी पड़ रही है। दूसरी ओर चीन (China) अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और ग्रीन एनर्जी को उत्पादन से उपयोग तक पहुंचाने के लिए सुपर ग्रिड विकसित कर रहा है। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सचिव ने भी इसकी ज़रूरत बताई थी।
भारत में औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बढ़ती आबादी के कारण आने वाले वर्षों में ऊर्जा खपत में बड़ा उछाल आने की संभावना है। पिछले कुछ दिन से ही बिजली की मांग अब तक की सर्वाधिक बनी हुई है।
चीन ने ट्रांसमिशन की चुनौती से निपटने के लिए अल्ट्रा हाई वोल्टेज (यूएचवी) आधारित सुपर ग्रिड विकसित किया है। इसमें 60,000 किलोमीटर से ज़्यादा अल्ट्रा हाई वोल्टेज (यूएचवी) ट्रांसमिशन लाइनें हैं। एक बार में 8-12 गीगावॉट बिजली ट्रांसफर करने की क्षमता है। कुल पवन और सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 1,840 गीगावॉट है। भारत को भी ऐसे ही सुपर ग्रिड की ज़रूरत है।
भारत में वर्तमान अधिकतम ट्रांसमिशन क्षमता 765 किलोवॉट एसी है। देश की स्थापित सौर एवं पवन क्षमता करीब 257 गीगावॉट है। देश में 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य 500 गीगावॉट है।
एनर्जी थिंक टैंक एम्बर की रिपोर्ट के अनुसार भारत में मई-दिसंबर 2025 के बीच करीब 2.3 टेरावॉट-घंटा (टीडब्ल्यूएच) सौर बिजली की कटौती हुई। अकेले अक्टूबर 2025 में लगभग 0.9 टीडब्ल्यूएच सौर बिजली ग्रिड में नहीं भेजी जा सकी। मई से दिसंबर 2025 के दौरान आपात ग्रिड प्रबंधन के तहत कटौती औसत मासिक सौर उत्पादन का करीब 18% तक पहुंच गई। दिसंबर 2025 में ट्रांसमिशन न होने के कारण करीब 4 गीगावॉट सौर क्षमता को कर्टेल करना पड़ा।
ऊर्जा एक्सपर्ट डीडी अग्रवाल का कहना है कि मिडिल ईस्ट संकट ने बताया है कि हमें एनर्जी सोर्स डाइवर्ट करने की ज़रूरत है। रिन्यूएबल एनर्जी के टारगेट को 500 गीगावॉट से ज़्यादा बढ़ाने और ट्रांसमिशन क्षमता को भी 6.5 लाख के टारगेट से बढ़ा कर 10 लाख सर्किट किलोमीटर करने की जरूरत है।