India Shia reaction on Iran: शिया समुदाय के नेता ने कहा कि हम अपनी पीढ़ियों को बताएंगे कि कैसे अमेरिका और इजराइल ने धोखे से हमारे लीडर को मारा।
Ali Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में शिया समुदाय द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। लोग ईरान के समर्थन में और इजरायल-अमेरिका के विरोध में नारे लगा रहे हैं। इसी बीच शिया समुदाय के नेता सैयद समर काजमी का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब हमने कोई लीडर खोया है, लेकिन हम अपने अजीम लीडर की मौत को नहीं भूलेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि हम अपनी पीढ़ियों को बताएंगे कि कैसे अमेरिका और इजराइल ने धोखे से हमारे लीडर को मारा। मुसलमानों का एक हिस्सा हमेशा प्यारे लीडर के रास्ते पर रहा है और हमेशा कहा है कि हम हमेशा दबे-कुचले लोगों के लिए आवाज़ उठाएंगे।
काजमी ने कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि उन्होंने फ़िलिस्तीन में हो रही हत्याओं के लिए आवाज़ उठाई थी, जबकि दुनिया चुप थी।
वहीं शिया धार्मिक नेता मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने जो हमला किया, उसे टेररिस्ट अटैक कहा जा रहा है। आज इसने पूरी खाड़ी को जंग में झोंक दिया है और आप सब खाड़ी में हालात देख रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया को समझना चाहिए कि अमेरिका और इजरायल कैसे पूरी दुनिया में खून-खराबा, नफरत और दहशतगर्दी फैला रहे हैं। खामेनेई किसी एक देश के लीडर नहीं थे, बल्कि हर दबे-कुचले इंसान, हर मुसलमान और हर इंसान के लीडर थे। कोई नहीं जानता कि यह चल रहा झगड़ा कहां ले जाएगा, लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि ईरान जीतेगा।
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद यूपी की राजधानी लखनऊ में भी शिया समुदाय ने प्रदर्शन किया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि जिनके खून में गद्दारी है, उन्होंने खामेनेई को धोखे से मारा है। अगर एक खामेनेई मारा गया, तो हज़ार खामेनेई उठ खड़े होंगे। इज़राइल और अमेरिका धोखेबाज़ हैं।
वहीं अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि यह जंग किसी भी मसले का हल नहीं है। मसले का हल बातचीत है और बातचीत के जरिए ही मसले को हल किया जाना चाहिए। ईरान ने ना झुककर अमेरिका का गुरूर और इजरायल का घमंड तोड़ दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि एक गरीब मुल्क ने जो जवाबी कार्रवाई की है, उससे अमेरिका तिलमिलाया हुआ है और इजरायल में बौखलाहट है, जिसके कारण वे चाहते हैं कि ईरान में तख्तापलट हो जाए, लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं है।