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सौ फीसदी इलेक्ट्रिक रेल लाइन बना कर भी मीलों पीछे कैसे है भारत! जानिए कितना आगे है चीन

चीन से पीछे क्यों है भारत? इलेक्ट्रिक रेल के बाद भी स्पीड में गैप। भारत में 99% विद्युतीकरण फिर भी चीन से पीछे क्यों? चीन की ट्रेनें 350km/h पर, भारत 130km/h तक सीमित क्यों?

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Feb 04, 2026
भारत में ट्रेनों की रफ्तार अभी चीन की तुलना में बहुत कम है। (फोटो सोर्स: एआई)

भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चले सौ साल हो गए हैं। इन सौ सालों में भारतीय रेल का लगभग पूरा ट्रैक इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने लायक हो गया है। इस उपलब्धि के बावजूद भारतीय रेल अभी बहुत पीछे है।

भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 3 फरवरी, 1925 को चली थी। यह 1500 वोल्ट डीसी सिस्टम वाली ट्रेन थी, जो बॉम्बे वीटी (विक्टोरिया टर्मिनस) से कुर्ला हार्बर तक चली थी।

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1957 में रेलवे ने 2500 वोल्ट 50 हर्ट्ज एसी ट्रेन चलाने का फैसला किया। सबसे पहले बर्दवान-मुगलसराय (अब दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन) के बीच यह ट्रेन चलाई गई। जनता के लिए पहली बार 2500 वोल्ट एसी ट्रेन 15 दिसंबर, 1959 को चली।

कब, किस तकनीक से और कितने पावर का इलेक्ट्रिक इंजन बना

क्र.सं.लोकोमोटिव की श्रेणीनिर्माण वर्षअश्वशक्ति (HP)तकनीक
DC लोकोमोटिव (DC Locomotives)
1WCM119543170इंग्लिश इलेक्ट्रिक (English Electric)
2WCM219562810इंग्लिश इलेक्ट्रिक
3WCM319572460इंग्लिश इलेक्ट्रिक
4WCM419603290हिताची (Hitachi)
5WCM519613700सी.एल.डब्ल्यू (CLW)
6WCM619965000सी.एल.डब्ल्यू
7WCG119252400स्विस लोको वर्क्स (Swiss Loco works)
8WCG219701640सी.एल.डब्ल्यू
AC/DC लोको (AC/DC Locos)
9WCAM119753640(AC) / 2930(DC)सी.एल.डब्ल्यू
10WCAM219954720(AC) / 3780(DC)सी.एल.डब्ल्यू
11WCAM319975000(AC) / 4600(DC)बी.एच.ई.एल (BHEL)
AC लोको (AC Locos)
12WAM119592870KM-KRUPP-SFAC
13WAM219602790मित्सुबिशी (Mitsubishi)
14WAM319642790मित्सुबिशी
15WAM419703640मित्सुबिशी
16WAP119803760सी.एल.डब्ल्यू
17WAP319873760सी.एल.डब्ल्यू
18WAP419945000सी.एल.डब्ल्यू
19WAP519936000ए.बी.बी (ABB)
20WAP619985000सी.एल.डब्ल्यू
21WAP720006350सी.एल.डब्ल्यू
22WAG119632900एस.एन.सी.एफ (SNCF)
23WAG219643180हिताची / मित्सुबिशी
24WAG319653150यूरोप (Europe)
25WAG419663150सी.एल.डब्ल्यू
26WAG519843900सी.एल.डब्ल्यू / बी.एच.ई.एल
27WAG619876000ए.एस.ई.ए (ASEA)
28WAG719925000सी.एल.डब्ल्यू
29WAG919966000ए.बी.बी / सी.एल.डब्ल्यू
30WAG9H20066000सी.एल.डब्ल्यू

भारतीय रेल ने 25 साल में किया 75 फीसदी रेल लाइन का विद्युतीकरण

आजादी के समय तक महज 388 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण हुआ था। साल 2000 तक कुल रेल ट्रैक का 24 प्रतिशत इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने लायक था, जो 2017 में 40 प्रतिशत और 2025 में लगभग सौ प्रतिशत हो गया। 2014 से 2025 के बीच 46900 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का विद्युतीकरण किया गया।

भारत में अभी ब्रॉड गेज रेल लाइन की लंबाई 70575 किलोमीटर के करीब है। नवंबर 2025 तक 99.2 प्रतिशत ट्रैक (70001 किलोमीटर) को इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने के लायक बना दिया गया है। नवंबर 2025 तक केवल पांच राज्यों (राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम और गोवा) में कुल 574 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेल लाइन का विद्युतीकरण होना बाकी रह गया था।

भारत आज है 70000 पर, चीन में 2018 में ही 92200 किलोमीटर

भारतीय रेल ने 2019-2025 के बीच 15 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से रेल लाइन का विद्युतीकरण किया। सरकार के मुताबिक 2004 से 2014 के बीच यह आंकड़ा 1.42 किलोमीटर प्रति दिन का था। भारत में जहां 2025 में 70000 किलोमीटर लंबी इलेक्ट्रिक रेल लाइन है, वहीं चीन में 2018 में ही 92200 किलोमीटर थी। 1980 में चीन में कुल 53300 किलोमीटर लंबी रेल लाइन थी, जिसमें इलेक्ट्रिक रेल लाइन की लंबाई मात्र 1700 किलोमीटर थी।

2024 के अंत तक चीन में कुल 162000 किलोमीटर लंबी रेल पटरियां थीं, इनमें से 120000 किलोमीटर से ज्यादा का विद्युतीकरण किया जा चुका था। वहां पूरी तरह से बिजली से चलने वाला पहला रेल सिस्टम 1975 में शुरू हुआ था। चीन ने पहला इलेक्ट्रिक एसी इंजन 1958 में बनाया था।

किस देश में कितने फीसदी रेल ट्रैक का विद्युतीकरण?

इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवेज की जून 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक इन देशों में रेल विद्युतीकरण की स्थिति कुछ इस तरह की थी:

देशरेलवे विद्युतीकरण (%)
स्विट्जरलैंड100%
चीन82%
स्पेन67%
जापान64%
फ्रांस60%
रूस52%
यूनाइटेड किंगडम39%

रफ्तार में हम सौ के करीब, चीन तिगुने पर

तेजी से विद्युतीकरण के बावजूद तेज रफ्तार ट्रेनें चलाने में भारत अभी काफी पीछे है। पिछले साल तक करीब 22 फीसदी ट्रैक पर ट्रेन की रफ्तार सौ किलोमीटर प्रति घंटा से कम थी। 60 फीसदी ट्रैक ही इस लायक हैं जिन पर गाड़ी की रफ्तार 110 से 130 किलोमीटर के बीच हो सकती है। चीन में हाई स्पीड ट्रैक की लंबाई 50 हजार किलोमीटर है। वहां ट्रेनें 350 किलोमीटर से ऊपर की रफ्तार से चलती हैं और 700 किलोमीटर पर ट्रायल चल रहा है।

भारत में 2003 में जिस मेमू (मेन-लाइन ईएमयू) ट्रेन का ट्रायल किया गया था उसकी अधिकतम रफ्तार 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। और, 2025 तक भी भारतीय रेल 130 से ज्यादा की स्पीड पर नहीं पहुंच पाया है।

भारत में ट्रायल में जिस अधिकतम रफ्तार तक कोई ट्रेन गई है वह है 180 किलोमीटर प्रति घंटा। वैसे अभी ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा तय है। वास्तव में इस रफ्तार के लायक ट्रैक की लंबाई काफी कम है। यहां ट्रेनों की औसत रफ्तार सौ से नीचे ही है। सबसे ज्यादा तेज चलने वाली ट्रेन (वंदे भारत) का भी यही हाल है।

चीन का लक्ष्य 5 साल में 50 किलोमीटर स्पीड बढ़ाने का, भारत में 25 साल में बढ़ी 25-30 किलोमीटर

दूसरी ओर, चीन में ईएमयू 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं। अगले पांच साल में इसे 400 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले जाने का प्लान है। भारत में करीब 500 अहमदाबाद से मुंबई की बीच करीब 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिस पर बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन की रफ्तार भी 300 किलोमीटर प्रति घंटा नहीं होगी। यह भारत कि सबसे तेज चलने वाली ट्रेन होगी।

चीन में चलेगी दो सेकंड में 700 की स्पीड पकड़ लेने वाली ट्रेन

दिसंबर, 2025 में चीन ने ऐसी मैगलेव ट्रेन का सफल परीक्षण किया है, जो महज दो सेकंड में 700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेती है। 2009 में ही उसने 394 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाली ट्रेन का परीक्षण कर लिया था। 2025 में उसने 450 किलोमीटर प्रति घंटा तक की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन का भी परीक्षण किया है। इसे इसी साल चलाने का प्लान है। 2026 में जब यह चलने लगेगी तो दुनिया की सबसे तेज चलने वाली ट्रेन हो जाएगी।

चीन में रेलवे ने 2025में 4.59 अरब यात्रियों को यात्रा कारवाई, जबकि 5.27 अरब टन सामान की ढुलाई की। चीन में कुल 165000 किलोमीटर लंबी रेल लाइन है। इसमें से 50000 किलोमीटर से भी ज्यादा हाई स्पीड रेल लाइन है। इनमें से 12000 किलोमीटर 2021 से 2025 के बीच बनी है।

चीन का लक्ष्य है कि साल 2030 तक देश में कुल रेल लाइन की लंबाई 180000 किलोमीटर और हाई स्पील रेल लाइन को 60000 किलोमीटर तक ले जाया जा सके। 2021-2025 के बीच चीन में कुल ट्रैक की लंबाई 146300 से 165000 तक पहुंचाई गई।

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