3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महज 500 मीटर दूर रह गए थे चीनी टैंक…सरकार को घेरने पर अड़े राहुल गांधी, आज पूरी की कल की कमी

नरवाने किताब विवाद से जुड़ा हर पहलू जानिए।

6 min read
Google source verification

भारत

image

Vijay Kumar Jha

Feb 03, 2026

Rahul Gandhi Lok Sabha debate, Parliament Budget Session 2026, Rajnath Singh challenge Rahul Gandhi, Rahul Gandhi China tanks Doklam claim,

राहुल के बयान पर लोकसभा में मचा हंगामा (Photo-X)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तीन फरवरी को एक बार फिर वह मुद्दा उठाया जो उन्हें दो फरवरी को नहीं उठाने दिया गया था। नियम संबन्धित एक कमी जो वह कल पूरी नहीं कर पाए थे, उसे आज पूरी कर उन्होंने सरकार पर हमला जारी रखा। इसके बावजूद उन्हें वह नहीं बोलने दिया गया, जो वह बोलना चाहते थे। इस पर सदन में खूब हंगामा हुआ और कार्यवाही कई बार रोकनी भी पड़ी।

राहुल दो फरवरी को सदन में कुछ कहना चाहते थे, लेकिन अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला ने नियमों का हवाला देकर उन्हें रोक दिया। वैसे तो सदन के भीतर स्पीकर का फैसला अंतिम होता है, लेकिन जहां तक नियम की बात है तो राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए एक विकल्प का इस्तेमाल कर सकते थे।

जिस रूल नंबर 349 के तहत स्पीकर ने उन्हें ‘कारवां’ पत्रिका में लिखी बात बोलने से रोकने की व्यवस्था दी, उसी नियम के प्रावधान के तहत राहुल गांधी वह बात बोल सकते थे। लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी अचारी की राय में अगर राहुल गांधी अपनी बात को ‘ऑथेंटिकेट’ कर लेते तो उन्हें बोलने की इजाजत मिल सकती थी।

राहुल गांधी ने 3 फरवरी को 'कारवां' पत्रिका के आर्टिकल को ‘ऑथेंटिकेट’ किया। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें बोलने की इजाजत नहीं मिली। इस पर विपक्षी सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अध्यक्ष की ओर कागज फेंकने के आरोप में आठ सांसद सस्पेंड किए गए।

अचारी ने दो फरवरी को एक टीवी चैनल पर कहा था, ‘ऑथेंटिकेट’ करने के लिए राहुल गांधी को बस इतना करना था कि पत्रिका या लेखक से पुष्टि करा लेनी थी और सदन में एक वाक्य कहना था कि वह जो कुछ भी कह रहे हैं, उसकी प्रामाणिकता की गारंटी लेते हैं और उस पर कायम हैं।

अचारी ने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी ऐसा कह देते तो उन्हें स्पीकर इजाजत दे सकते थे, क्योंकि पूर्व में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब ‘ऑथेंटिकेट’ करने के बाद सांसद को स्पीकर ने बोलने की इजाजत दी है।

वैसे, बता दें कि दो फरवरी को राहुल गांधी ने सदन में आर्टिकल का प्रिंट आउट दिखाते हुए कहा था, 'यह पूरी तरह ऑथेंटिकेटेड है।' पर उन्होंने ये शब्द नहीं कहे थे कि इसमें जो कुछ भी लिखा है, वह सही है और मैं उस पर कायम रहूंगा।

इस सवाल पर कि क्या राहुल गांधी जो कहना चाह रहे थे वह "Business of the House" (जिस काम के लिए सदन बैठा है) के दायरे में आता था? अचारी ने कहा- सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। अभिभाषण में स्वाभाविक रूप से भारत के पड़ोसी देशों से संबंधों का जिक्र होता है। दूर के देशों से रिश्तों की भी चर्चा होती है। ये सब चीजें होती है। तो भारत-चीन संबंध पर भी कुछ न कुछ होगा। इसलिए राहुल जो बात कहना चाह रहे थे, वह ‘बिजनेस ऑफ द हाउस’ के दायरे में आता है।

अभिभाषण में चीन पर क्या था?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ने 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित किया था। इसमें उन्होंने 56 बिन्दुओं पर सरकार की उपलब्धियां गिनाई थीं। चीन का कहीं जिक्र नहीं था। पाकिस्तान पर भी सीधे तौर पर कहीं जिक्र नहीं था।

अंतराष्ट्रीय संबंधों और भारतीय विदेश नीति का जिक्र तो था, पर इस रूप में कि कैसे भारत विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपना दबदबा बढ़ा रहा है और दुनिया के जिन देशों को प्राकृतिक आपदा आदि की स्थिति में मदद की जरूरत होती है, उन्हें तत्काल मदद भेजती है।

26वें पॉइंट्स में राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया था। यह बताते हुए कि भारत किसी से डरे बिना देश की सुरक्षा करता है और ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया ने भारतीय रक्षा बलों की ताकत देखी। उन्होंने कहा कि देश ने अपने संसाधनों के दम पर आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त किए और सरकार ने सख्त संदेश दिया कि भारत पर कोई आतंकी हमला हुआ तो निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

देश की विदेश नीति का जिक्र करते हुए 45वें पॉइंट के तौर पर राष्ट्रपति ने कहा था कि दुनिया में चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद अपनी संतुलित विदेश नीति और सरकार की दूरदर्शिता के दम पर भारत लगतार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता जा रहा है।

रूल 349 क्या है?

रूल 349 में वैसे तो 23 पॉइंट्स हैं, हम यहां हम उन्हीं का जिक्र कर रहे हैं जो किताब आदि कोट करने से संबंधित हैं। पहले ही पॉइंट में लिखा है- सदस्यगण ऐसी कोई किताब, अखबार या पत्र नहीं पढ़ेंगे जिनका 'बिजनेस ऑफ हाउस' से संबंध नहीं हो।

राहुल गांधी क्या पढ़ना चाहते थे सदन में?

राहुल गांधी 'कारवां' पत्रिका में प्रकाशित एक लेख की कुछ पंक्तियां पढ़ना चाहते थे। यह लेख पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवाने के हवाले से था। कहा गया था कि यह जनरल नरवाने की किताब 'फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी' का अंश है। यह किताब अभी छपी नहीं है।

कहा जा रहा है कि रक्षा मंत्रालय अभी इसकी समीक्षा कर रहा है। जनरल नरवाने पुराने इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उन्होंने किताब लिख कर 'पेंगुइन' (प्रकाशक) को दे दी। अब इसके प्रकाशन के लिए जरूरी अनुमति लेने आदि की औपचारिकता पूरी करना प्रकाशक की जिम्मेदारी है। अनुमति को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है, इस पर किसी की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बताया गया है।

31 अगस्त, 2020 की रात की कहानी, सेना प्रमुख की जुबानी

जो पंक्तियां राहुल गांधी पढ़ना चाहते थे, उनके मुताबिक 31 अगस्त, 2020 को रात सवा आठ बजे जनरल नरवाने (जो तब सेना प्रमुख थे) को उत्तरी कमान के सेना प्रमुख ने फोन कर बताया कि चीन के चार टैंक लद्दाख में भारत की ओर बढ़ रहे हैं और उन्हें फायर नहीं करने के आदेश हैं। भारतीय सीमा में कैलाश रेंज पर जहां भारतीय सेना ने पोजिशन ले रखी थी, वहां से कुछेक सौ मीटर की दूरी पर वे टैंक थे। 9.10 बजे सेना प्रमुख के पास फिर फोन आया और बताया गया कि टैंक रेचिन ला दर्रे से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर रह गए हैं। 22.10 बजे बताया गया कि टैंक अब 500 मीटर से भी कम दूर रह गए हैं।

संबंधित खबरें

इस बीच सेना प्रमुख ने कई फोन किए। उत्तरी कमान प्रमुख की ओर से रात सवा आठ बजे पहला फोन आने के बाद जनरल नरवाने ने रक्षा मंत्री (राजनाथ सिंह), विदेश मंत्री (एस जयशंकर), राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (अजित डोवाल) और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (जनरल विपिन रावत) से बात की। नरवाने ने सबसे यही पूछा कि सेना के लिए क्या आदेश है?

9.10 बजे उत्तरी कमान से दूसरी बार फोन आने के बाद 9.25 बजे सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री को फिर फोन किया। उन्हें ताजा अपडेट दिया और कहा कि सेना के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाएं। स्थिति गंभीर है।

इस बीच हॉटलाइन पर बातचीत हुई थी और पीएलए (चीनी सेना) के कमांडर मेजर जनरल लिउ लिन का संदेश आया कि दोनों पक्ष की सेनाएं अब आगे नहीं बढ़ेंगी और सुबह 9.30 बजे दोनों सेनाओं के स्थानीय कमांडर मुलाक़ात करेंगे।

जनरल नरवाने ने रात के दस बजे रक्षा मंत्री और एनएसए को फिर फोन किया और यह जानकारी दी। लेकिन फोन रखते ही 22.10 बजे एक बार फिर उत्तरी कमान प्रमुख का फोन आया। उन्होंने बताया कि टैंक फिर आगे बढ़ने लगे हैं और महज 500 मीटर दूर रह गए हैं।

रक्षा मंत्री को फिर फोन करके सेना प्रमुख ने यह बात बताई। उन्होंने कहा- मैं वापस कॉल करता हूं। 22.30 बजे रक्षा मंत्री का फोन आया। उन्होंने सेना प्रमुख से कहा कि प्रधानमंत्री से बात हुई है। यह पूरी तरह सेना का निर्णय होगा। जो उचित समझो वो करो।

पहले भी सार्वजनिक हो चुकी है यह कहानी

दिसंबर 2023 में समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी जनरल नरवाने के संस्मरण के कुछ अंश जारी किए थे। ऊपर बताई गई बातें भी तब पीटीआई ने सार्वजनिक की थीं।

यह किताब जनवरी 2024 में बाजार में आने वाली थी। लेकिन, इससे पहले 'इंडियन एक्सप्रेस' ने खबर दी थी कि भारतीय सेना किताब की समीक्षा कर रही है और जब तक यह पूरी नहीं हो जाती तब तक किसी को भी किताब के अंश या पाण्डुलिपि नहीं देने के लिए कहा गया है।

समीक्षा क्यों?

सरकारी अफसरों पर सरकारी गोपनीयता कानून (official secrets act) लागू होता है। किताब छपवाने के लिए सैन्य बलों के अफसरों व नौकरशाहों को एक नियम का पालन करना होता है। मौजूदा अफसरों के लिए तो नियम स्पष्ट हैं, लेकिन रिटायर हो चुके अफसरों के मामले में उतनी स्पष्टता नहीं है।

1954 के सैन्य नियम की धारा 21 के तहत सरकारी काम के संदर्भ में हुई कोई बातचीत, लिखा-पढ़ी या पत्राचार आदि को केंद्र सरकार की अनुमति लिए बिना किसी रूप (किताब आदि) में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। विषय या तथ्य सरकारी कामकाज से जुड़ा न हो, साहित्यिक या कला आदि से जुड़ा हो तो किताब आदि लिखने की छूट मिल सकती है। यह तो नौकरी कर रहे कर्मियों या अफसरों के लिए है, लेकिन रिटायर हो चुके लोगों के लिए नियम साफ नहीं हैं।

उनके लिए सेंट्रल सिविल सेर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 है। इसमें 2021 में बदलाव किया गया। इसके मुताबिक खुफिया या सैन्य संगठनों से रिटायर हुए लोगों को बिना अनुमति के काम से संबन्धित कोई जानकारी सार्वजनिक या प्रकाशित करने की मनाही है।

Story Loader