
Indian Army Drone Force Plan: अर्मेनिया-अजरबैजान सैन्य संघर्ष फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब ईरान-अमेरिका की जंग से यह बात साफ हो गई है कि युद्ध का तरीका पूरी तरह से बदल गया है। ड्रोन और UAV (अनमेन्ड एरियल व्हिकल) जंग का सबसे अहम हिस्सा बन गए हैं। इसे देखते हुए सेना ने भी तैयारी शुरू कर दी है।
सैन्य ताकत को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना अगले पांच साल में हजारों की संख्या में स्वदेशी मानवरहित हवाई प्रणाली और लोइटरिंग म्यूनिशन को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और निबे प्राइवेट लिमिटेड के साथ लॉइटरिंग म्यूनिशन (यानी कामिकेज़ ड्रोन) और उससे जुड़े उपकरणों के लिए ₹1,577 करोड़ के दो कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कि लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम एक बेहद अहम हथियार है, जो तोपखाना रेजिमेंट की क्षमता को और मजबूत बनाएगा। इससे सेना की समग्र ऑपरेशनल ताकत में भी इजाफा होगा। ये ऐसे हथियार होते हैं जो हवा में मंडराते हुए दुश्मन के ठिकानों की पहचान करते हैं और सही मौका मिलते ही सीधा हमला करते हैं।
खास बात यह है कि इन दोनों समझौतों के तहत सारी खरीद भारतीय वेंडरों से 'बाय इंडियन' योजना के तहत फास्ट ट्रैक प्रक्रिया से की जाएगी। मंत्रालय के मुताबिक इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सपना और मजबूत होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि भारत को 2030 तक ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनना चाहिए।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में जारी की गई मानवरहित हवाई प्रणाली और लोइटरिंग म्यूनिशन को लेकर तकनीकी रोडमैप के मुताबिक सेना को कुल 80 अलग-अलग तरह के मानवरहित सिस्टम चाहिए। इनका इस्तेमाल जासूसी और निगरानी, सटीक हमले, गोला-बारूद गिराने, हवाई सुरक्षा, जैमिंग, माइन वारफेयर, डाटा रिले और लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में किया जाएगा।
निगरानी के लिए सेना को हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस यूएएस, मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस यूएएस, हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट और अलग-अलग दूरी के लिए मानवरहित एयर लिटोरल सिस्टम चाहिए। वहीं हमले के लिए सेना लंबी, मध्यम और छोटी दूरी तक मार करने वाले लोइटरिंग म्यूनिशन, ड्रोन स्वार्म और हमला करने में सक्षम एफपीवी ड्रोन तलाश रही है। इसके अलावा हंटर किलर सिस्टम और गाइडेड-अनगाइडेड बम ले जाने वाले खास सिस्टम भी सेना की जरूरतों में शामिल हैं।
यह पूरी योजना मार्च में जारी हुए डिफेंस फोर्सेज विजन 2047 रोडमैप से भी जुड़ी हुई है, जिसके तहत भारत अपनी अलग ड्रोन फोर्स खड़ी करने की तैयारी में है। साफ है कि आने वाले सालों में भारतीय सेना की ताकत सिर्फ पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसमान में मंडराते ये मानवरहित हथियार युद्धक्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह बदल देंगे।