Iran Israel America War: ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत सरकार ने हालात को नियंत्रण में बताया है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि समुद्री व्यापार सामान्य हो रहा है, जहाजों की आवाजाही स्थिर है और सरकार ने समय पर कदम उठाकर सप्लाई चेन पर असर को काफी हद तक कम किया है।
India On Iran Israel War: ईरान से जुड़ी बढ़ती तनातनी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंता के बीच भारत सरकार ने हालात पर पहली बार विस्तार से अपनी स्थिति साफ की है। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने साफ कहा है कि हालात अब काफी हद तक काबू में हैं और समुद्री व्यापार धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के त्वरित और समन्वित कदमों से भारत के समुद्री व्यापार पर पड़े असर को काफी हद
तक नियंत्रित कर लिया गया है और अब हालात तेजी से सामान्य हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने बताया कि मंत्रालय ने शुरुशुआत से ही लगातार निगरानी और सभी प्रमुख बंदरगाहों व हितधारकों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखा। जहाजों की आवाजाही, कार्गो कंजेशन और बंदरगाह-स्तरीय संचालन पर नजर रखने के लिए रियल-टाइम रिव्यू मैकेनिज्म लागू किया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि पीएम मोदी के स्पष्ट निर्देश थे कि आपूर्ति श्रृंखला पर कम से कम असर पड़े, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएं। इसी के तहत बंदरगाहों को इनोवेशन आधारित संचालन, यार्ड क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स प्लानिंग को सुगम बनाने के निर्देश दिए गए।
मंत्री ने यह भी कहा कि सबसे अहम बात यह रही कि जो बैकलॉग बना था, उसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अब क्लियर कर दिया गया है। यानी जो जहाज और कार्गो फंसे हुए थे, वे अब धीरे-धीरे अपनी मंजिल तक पहुंच रहे हैं। सरकार का दावा है कि अब जहाजों की आवाजाही लगभग सामान्य हो चुकी है। हालांकि, राहत के बावजूद सतर्कता बरती जा रही है। मंत्रालय अभी भी लगातार निगरानी कर रहा है ताकि अगर कोई नई समस्या सामने आए तो तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सरकार ने व्यापार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए कुछ आर्थिक कदम भी उठाए हैं। बंदरगाहों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राउंड रेंट में छूट दी जाए और कुछ चार्जेस में राहत दी जाए, ताकि निर्यातकों और आयातकों पर बोझ कम हो सके। साथ ही शिकायतों को जल्दी सुलझाने के लिए सिस्टम को भी मजबूत किया गया है।
सोनोवाल ने साफ चेतावनी दी कि इस तरह के संकट में मुनाफाखोरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिपिंग चार्जेस में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं, और अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो सख्त कार्रवाई होगी।