
Indian Railways: दिवाली और छठ पूजा से पहले देश में ट्रेनों की लेटलतीफी, नेटवर्क पर बढ़ते दबाव और वेटिंग लिस्ट की समस्या को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अहम जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर पीक कंजेशन यानी अत्यधिक दबाव की स्थिति बनी हुई है। कोयले और अन्य माल की ढुलाई में तेजी आने से रेल नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। इससे यात्री ट्रेनों के संचालन और उपलब्धता पर भी असर पड़ रहा है।
रेल मंत्री वैष्णव ने आगे कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान रेलवे ट्रैक की संख्या और क्षमता बढ़ाना है। पिछले 10 वर्षों में देशभर में 36 हजार किलोमीटर अतिरिक्त रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। उन्होंने कहा कि नए ट्रैक का निर्माण और मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसके बिना ट्रेनों की लेटलतीफी और वेटिंग लिस्ट जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे बताया कि रेलवे की क्षमता बढ़ाने के लिए देश के 7 प्रमुख रेल कॉरिडोर का चौहरीकरण किया जा रहा है। इनमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को जोड़ने वाले रेल मार्गों के साथ कुछ प्रमुख डायगोनल कॉरिडोर भी शामिल हैं।
इनमें दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-कोलकाता और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे महत्वपूर्ण रेल मार्ग शामिल हैं। इन कॉरिडोर पर चार रेलवे लाइनें बनने से ट्रेनों की आवाजाही के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।
रेल मंत्री ने कहा कि इन रेल कॉरिडोर का चौहरीकरण पूरा होने के बाद रेलवे 1000 से अधिक अतिरिक्त नियमित ट्रेनें चला सकेगा। इससे यात्रियों को ट्रेनों में ज्यादा विकल्प मिलेंगे और वेटिंग लिस्ट का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही टिकटों की उपलब्धता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार नई परियोजनाओं को मंजूरी दे रहे हैं। कई बार हर दूसरी या तीसरी कैबिनेट बैठक में रेलवे से जुड़ी नई परियोजनाओं को स्वीकृति मिलती है।
उन्होंने कहा कि रेलवे का पूरा फोकस नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर है। नए ट्रैक बिछाने और प्रमुख कॉरिडोर का चौहरीकरण होने से भविष्य में यात्री और मालगाड़ियों दोनों के संचालन में आसानी होगी। इससे ट्रेनों की लेटलतीफी कम करने और यात्रियों को बेहतर रेल सुविधाएं देने में मदद मिलेगी।