समुद्र तल से 13,629 फीट की ऊंचाई पर इतने भारी विमान को उतारना तकनीकी रूप से एक जटिल और चुनौतीपूर्ण मिशन था। इतनी ऊंचाई पर हवा का घनत्व काफी कम होता है, जिससे विमान के इंजनों के लिए पर्याप्त थ्रस्ट पैदा करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही, लैंडिंग के दौरान विमान के पंखों को मिलने वाली लिफ्ट भी कम हो जाती है।