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भारतीय वायुसेना ने रचा इतिहास, LAC के पास 13,629 फीट की ऊंचाई पर उतरा IL-76MD विमान

भारतीय वायुसेना के IL-76MD विमान ने लद्दाख के न्योमा में 13,629 फीट की ऊंचाई पर सफल लैंडिंग कर इतिहास रच दिया। वायुसेना के अनुसार, यह विमान की दुनिया में अब तक की सबसे ऊंची लैंडिंग है।
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भारत

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Anand Shekhar

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Updated: 7 Nov 2026, 1:47 PM IST

Indian Air force

लैंड होता भारतीय वायु सेना का विमान (फ़ोटो- X@Airforce)

Indian Air Force Milestone: भारतीय वायु सेना (IAF) ने पूर्वी लद्दाख के रणनीतिक रूप से संवेदनशील न्योमा क्षेत्र में 13,629 फीट की ऊंचाई पर अपने इल्यूशिन IL-76MD विमान को सफलतापूर्वक उतारकर एक नया वैश्विक रिकॉर्ड बनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में IAF ने इस उपलब्धि को विमानन इतिहास में एक नया मील का पत्थर बताया है।

वायुसेना के अनुसार, यह पूरे विश्व में किसी भी भारी रणनीतिक ट्रांसपोर्ट विमान द्वारा हासिल की गई अब तक की सबसे ऊंची लैंडिंग है। यह उपलब्धि विमान की तकनीकी मजबूती के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के पायलटों और क्रू मेंबर्स के असाधारण कौशल, सटीकता और उच्च स्तरीय पेशेवर क्षमता का प्रमाण है।

अत्यधिक ऊंचाई और तेज हवा की चुनौती

समुद्र तल से 13,629 फीट की ऊंचाई पर इतने भारी विमान को उतारना तकनीकी रूप से एक जटिल और चुनौतीपूर्ण मिशन था। इतनी ऊंचाई पर हवा का घनत्व काफी कम होता है, जिससे विमान के इंजनों के लिए पर्याप्त थ्रस्ट पैदा करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही, लैंडिंग के दौरान विमान के पंखों को मिलने वाली लिफ्ट भी कम हो जाती है।

ऐसे वातावरण में विमान को सुरक्षित रूप से रोकने के लिए एक लंबे रनवे और सटीक ब्रेकिंग कंट्रोल की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, लद्दाख घाटी की तेज हवाओं और ऊंची पर्वत चोटियों के बीच इतने बड़े विमान को उतारने के लिए सही दिशा में लाना बेहद जोखिम भरा काम था, जिसे कुशल IAF पायलटों ने बिना किसी गलती के बखूबी अंजाम दिया।

सैन्य उपकरण ले जाने के लिए किया जाता है इस्तेमाल

भारतीय वायु सेना के बेड़े में 'गजराज' के नाम से जाना जाने वाला IL-76MD विमान भारी सैन्य उपकरणों जैसे तोपखाने, टैंक और सैनिकों को सीधे युद्ध के मैदान तक तेजी से पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। चार इंजनों वाला यह विशाल विमान लगभग 190 टन के अधिकतम टेक-ऑफ वजन के साथ उड़ान भर सकता है और 40 टन से अधिक पेलोड ले जाने में सक्षम है।

LAC के पास न्योमा एयरबेस का महत्व

पूर्वी लद्दाख में स्थित न्योमा एयरफील्ड वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। 2020 के बाद से भारत सरकार ने यहां बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया है, ताकि इस एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड को एक पूर्ण लड़ाकू और रणनीतिक एयरबेस में बदला जा सके।

न्योमा पर IL-76MD की सफल लैंडिंग से यह साबित हो गया है कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति के दौरान भारतीय सेना केवल कुछ ही घंटों के भीतर देश के किसी भी कोने से भारी हथियार, बख्तरबंद गाड़ियां और अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां सीधे सीमा पर तैनात कर सकती है।