Indian Railways Electricity Surcharge: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे केवल अपनी ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों के संचालन के लिए बिजली का उपयोग करता है। वह आम उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई नहीं करता…
Indian Railways Electricity Surcharge Update: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे से जुड़े बिजली खरीद मामले में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि भारतीय रेलवे को ओपन एक्सेस के जरिए दूसरी कंपनियों से बिजली खरीदने पर क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त सरचार्ज देना होगा। रेलवे खुद को डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी बताकर इन शुल्कों से छूट मांग रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह दावा खारिज कर दिया। इससे राजस्थान समेत अन्य राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रेलवे केवल अपनी ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों के संचालन के लिए बिजली का उपयोग करता है। वह आम उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई नहीं करता, इसलिए उसे बिजली वितरण कंपनी का दर्जा नहीं मिल सकता। कोर्ट ने सभी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को कहा है कि वे रेलवे पर बकाया सरचार्ज की गणना करें। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और ओपन एक्सेस अवधि का पूरा हिसाब शामिल होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली क्षेत्र में यह सरचार्ज व्यवस्था इसलिए जरूरी है ताकि गरीब, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जा सके। कोर्ट ने रेलवे की सभी अपीलें खारिज करते हुए अपीलीय ट्रिब्यूनल के 12 फरवरी 2024 के फैसले को बरकरार रखा।
रेलवे पहले राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों में संबंधित डिस्कॉम्स से सीधे बिजली खरीदता था। वर्ष 2017 के बाद रेलवे ने ओपन एक्सेस के जरिए बाहर से सस्ती बिजली खरीदना शुरू कर दिया। इस पर जयपुर डिस्कॉम ने एक्ट का हवाला देते हुए रेलवे से अतिरिक्त सरचार्ज और क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज देने के लिए कहा। लेकिन रेलवे ने खुद को डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी बताते हुए इनकार कर दिया।
जयपुर डिस्कॉम राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग पहुंचा, जहां उसके पक्ष में फैसला हुआ। रेलवे इस फैसले के खिलाफ अपीलीय ट्रिब्यूनल में पहुंचा। ट्रिब्यूनल ने आयोग के फैसले को खारिज कर दिया। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। यहां जयपुर डिस्कॉम सहित अन्य राज्यों में दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने क्लब कर एक साथ सुनवाई की।