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स्तन कैंसर के इलाज के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने ढूंढा नया तरीका, रोशनी से नियंत्रित नैनोबॉट किया विकसित

Breast Cancer Therapy: भारतीय वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए एक नया तरीका ढूंढ निकाला है। क्या है यह तरीका? आइए जानते हैं।
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Aug 06, 2026
Breast cancer therapy
स्तन कैंसर थैरेपी (Photo - Department Of Science & Technology)

दुनिया भर में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौतों के मुख्य कारणों में स्तन कैंसर (Breast Cancer) एक है। पारंपरिक कीमोथेरेपी में अक्सर गंभीर साइड इफेक्ट्स, दवा के प्रति रेजिस्टेंस और स्वस्थ टिश्यू को नुकसान होता है। ऐसा दवा के नॉन-स्पेसिफिक डिस्ट्रीब्यूशन, ट्यूमर में दवा के ठीक से न पहुंचने और शरीर में दवा देने के बाद उस पर एक्टिव कंट्रोल न होने की वजह से होता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय वैज्ञानिकों (Indian Scientists) ने एक एडवांस मल्टीफंक्शनल नैनोबॉट (Nanobot) बनाया है जो ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में मदद कर सकता है। यह रोशनी से नियंत्रित होता है।

कैसे काम करेगा नैनोबॉट?

मौजूदा नैनोमेडिसिन मुख्य रूप से पैसिव ट्यूमर एक्युमुलेशन पर निर्भर करती हैं, जिससे टिश्यू में दवा कम पहुंचती है और स्थानिक कंट्रोल (स्पेशियल कंट्रोल) भी कम होता है। वहीं ज़्यादातर लाइट-पावर्ड माइक्रो/नैनोरोबोट्स को अल्ट्रावॉयलेट या विज़िबल लाइट की ज़रूरत होती है, जो टिश्यू में कम गहराई तक पहुंचती है और स्वस्थ टिश्यू को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके उलट, स्टिमुलस-रिस्पॉन्सिव नैनोबॉट्स बाहरी (जैसे, नियर-इन्फ्रारेड लाइट या मैग्नेटिक फील्ड) या अंदरूनी (जैसे, pH या एंजाइम) संकेतों से कंट्रोल होते हैं। ये कम से कम सिस्टमिक टॉक्सिसिटी के साथ सटीक और टारगेटेड इलाज देते हैं, जिससे ये सटीक इलाज के लिए भविष्य का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म बन जाते हैं।

मोहाली में हुई खोज

मोहाली में इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) के वैज्ञानिकों ने, जो डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) का एक ऑटोनॉमस संस्थान , नैनोरोबोटिक्स और फोटोथेरेपी को मिलाकर एक इंटेलिजेंट थेराप्यूटिक प्लेटफॉर्म बनाने की कल्पना की। यह प्लेटफॉर्म बाहरी लाइट की मदद से एक्टिव रूप से नेविगेट करने और साथ ही टारगेटेड कैंसर का इलाज करने में सक्षम है। ये नैनोबॉट नियर-इन्फ्रारेड (NIR) लाइट को कुशलतापूर्वक गर्मी में बदलने में सक्षम हैं और NIR की मौजूदगी में दिशात्मक गति (डायरेक्शनल मूवमेंट) दिखाते हैं।

कैसे किया गया इस्तेमाल?

टीम ने नैनोबॉट को एक फोटोसेंसिटाइज़र के साथ फंक्शनलाइज़ किया, जिससे NIR रेडिएशन पड़ने पर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS) पैदा हो सकें। NIR रेडिएशन पड़ने पर नैनोबॉट ने लाइट-गाइडेड डायरेक्शनल मूवमेंट (फोटोटैक्सिस) भी दिखाया, जिससे खास जगह पर इलाज करना आसान हो गया। इसके अलावा फोलिक एसिड के साथ सरफेस फंक्शनलाइज़ेशन ने फोलेट रिसेप्टर्स को ज़्यादा एक्सप्रेस करने वाली स्तन कैंसर कोशिकाओं की चुनिंदा पहचान और उन्हें टारगेट करना संभव बनाया, जिससे ट्यूमर-स्पेसिफिक फोटोथेराप्यूटिक क्षमता बढ़ गई। जब पॉलीडोपामाइन को 980 nm NIR लेज़र के संपर्क में लाया जाता है, तो यह स्थानीय स्तर पर गर्मी पैदा करता है, जिससे तापमान में अंतर बनता है। तापमान का यह अंतर गर्मी से प्रेरित गति पैदा करता है, जिससे नैनोबॉट फोटोटैक्सिस के ज़रिए सक्रिय रूप से लेज़र स्रोत की ओर बढ़ते हैं। साथ ही फोटोथर्मल हीटिंग और फोटोडायनामिक ROS उत्पादन कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। इन मिले-जुले प्रभावों से अलग-अलग उपचार विधियों की तुलना में ट्यूमर को रोकने में बेहतर परिणाम मिलते हैं।

Updated on:
06 Aug 2026 12:52 am
Published on:
06 Aug 2026 12:52 am