राष्ट्रीय

दुनिया की सबसे बड़ी युवा शक्ति के इस्तेमाल में कहां पिछड़ रहा भारत?

भारत के सबसे बड़े हथियार में क्यों नहीं आ रही धार? क्यों बेकार हो रही भारत की सबसे बड़ी ताकत? युवा शक्ति के सही इस्तेमाल में क्या हैं समस्याएं और उसका क्या भुगतना पड़ रहा खामियाजा?
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India's young population faces unemployment, skill mismatch and lack of education and employment opportunities
युवा शक्ति में नंबर एक होकर भी भारत उसका फायदा उठाने में पिछड़ रहा है। (इमेजिंग: एआई)

दुनिया में सबसे ज्यादा युवा भारत में हैं। यूनिसेफ के मुताबिक भारत में 15-29 साल के 37.1 करोड़ युवा हैं। भारत सरकार के युवा मामलों व खेल मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक देश की 65 फीसदी आबादी 35 साल या उससे कम उम्र की है। लेकिन, इन युवाओं के लिए पढ़ाई और रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं हैं। नतीजतन बड़ी संख्या में युवा अपराध और गैर उत्पादक कार्यों में लगे रहते हैं। इस तरह देश विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति का फायदा उठाने में पिछड़ रहा है।

न पढ़ाई, न रोजगार

सरकार ने हाल ही में पहली बार जिलावार पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) रिपोर्ट जारी किया है। 2025 के लिए जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है देश के करीब 250 जिलों में 25 फीसदी से ज्यादा युवा (15-29 साल के) न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न किसी तरह की ट्रेनिंग ले रहे हैं और न ही कोई रोजगार कर रहे हैं। ये किसी भी तरह के उत्पादक काम में नहीं लगे हैं। यहां ध्यान देने की बात है कि अगर एक साल में कोई 30 दिन भी काम करता है तो उसे इस सर्वे में बेरोजगार के तौर पर नहीं गिना जाता है। इससे पता चलता है कि युवा शक्ति के उचित इस्तेमाल में अभी हम कितना पीछे हैं।

पीएलएफ़एस का ही आंकड़ा है कि जून 2026 में युवा बेरोजगारी की दर 16.2 प्रतिशत थी। यानि रोजगार चाहने वाला हर छह में से एक युवा खाली हाथ था। जून 2025 में यह आंकड़ा 15.3 प्रतिशत था।

केवल बेरोजगारी नहीं, उचित रोजगार का अभाव भी समस्या

रोजगार की बात की जाए तो समस्या एक नहीं है। अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे युवाओं के अलावा पढ़े-लिखे युवाओं के लिए भी काम नहीं है। यह समस्या तो है ही, लेकिन डिग्री या हुनर के मुताबिक काम नहीं होना उससे भी बड़ी समस्या है। हालत यह है कि इंजीनियरिंग किया हुआ युवा चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहा है। दूसरी ओर, बाजार का कहना है कि उसे जैसे युवा चाहिए, कॉलेज-यूनिवर्सिटी उस तरह की शिक्षा देकर उन्हें तैयार नहीं कर पा रहे।

पढ़ाई और रोजगार में तालमेल नहीं

नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल 8.25 प्रतिशत युवा ही अपनी पढ़ाई या डिग्री के लिहाज से सही काम कर पा रहे हैं। बाकी 91.75 प्रतिशत जो काम कर रहे हैं, उसमें उनके द्वारा की गई पढ़ाई या ली गई डिग्री की कोई भूमिका नहीं है। उन्हें या तो काम की जरूरत के हिसाब से स्किल हासिल करनी होती है या स्किल के हिसाब से कमतर काम करना पड़ता है।

रिपोर्ट के मुताबिक उच्च शिक्षा पा चुके 80 फीसदी छात्रों के पास काम के हिसाब से व्यावहारिक ज्ञान का अभाव है या संबंधित उद्योग से उनका कोई वास्ता नहीं रहा है। यह उन्हें रोजगार के बाजार से दूर करता है और युवा शक्ति के समुचित इस्तेमाल में बड़ी बाधा खड़ी करता है।

संगठित क्षेत्र बहुत ही सिकुड़ा हुआ

एक और बड़ी समस्या है संगठित क्षेत्र का बहुत छोटा होना। नीति आयोग द्वारा प्रकाशित एक शोध बताती है कि भारत में केवल 23 प्रतिशत वर्कफोर्स ही नियमित आमदनी या वेतन वाले काम में लगा है। 19 प्रतिशत लोग कैजुअल एम्पलायी हैं। बाकी बचे करीब 58 फीसदी अपना काम करते हैं या छोटा-मोटा कारोबार करते हैं।

अपराध की दुनिया में युवा बढ़ा रहे कदम

पढ़ाई और रोजगार के साधनों में कमी के चलते युवा अपराधी बन रहे हैं। यह कमी उनके अपराध में शामिल होने का एक मात्र कारण भले न हो, लेकिन एक कारण जरूर है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक 34878 अपराधों के आरोपी नाबालिग थे। 2023 की तुलना में यह 11.7 प्रतिशत अधिक था। 77.7 प्रतिशत आरोपियों की उम्र 16-18 साल थी। 2014 की एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक कुल गिरफ्तार आरोपियों में 44 प्रतिशत 10 से 30 साल के थे।

कई मनोवैज्ञानिकों ने निष्कर्ष दिया है कि उचित अवसर के अभाव में युवाओं में खीझ और झल्लाहट पैदा होती है। इस खीझ व झल्लाहट में वे 'सफल' होने के लिए कोई भी कदम उठा लेते हैं। यहां तक कि गुनाहों की दुनिया में भी कदम बढ़ा देते हैं।

Updated on:
21 Sept 2026 08:36 pm
Published on:
21 Sept 2026 07:19 pm