केंद्रीय सूचना आयोग ने समाज में प्रचलित नाता प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। इस प्रथा के तहत होने वाले महिलाओं के शोषण पर केंद्रीय सूचना आयोग ने नाराजगी जाहिर की है और ऐसी प्रथाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने की सिफारिश की है।
केंद्रीय सूचना आयोग ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों में प्रचलित 'नाता प्रथा' पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिया है कि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी गई कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से जनहित का विषय माना है।
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने कहा कि RTI के तहत मांगी गई सभी सूचनाएं साझा नहीं की जा सकतीं, खासकर शिकायतकर्ताओं और उनके परिवारों से जुड़ी निजी जानकारी। लेकिन मंत्रालय द्वारा इस कुप्रथा पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। सूचना देकर सार्वजनिक करने से पहले निजी जानकारियों संबंधी संवेदनशील हिस्सों हो हटा दिया जाए। दरअसल, RTI में नाता प्रथा के मामले में मंत्रालय, NHRC और संबंधित राज्य सरकारों के बीच पत्राचार और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी।
NHRC ने राजस्थान के एक गंभीर मामले का जिक्र किया। इसमे एक नाबालिग लड़की को उसके पिता ने नाता प्रथा के तहत ढाई लाख रुपए में बेच दिया था। शुरुआती भुगतान के बाद शेष राशि न मिलने पर पिता लड़की को वापस ले आया और दूसरी जगह 32000 रुपए में नाता तय कर दिया। हालांकि, लड़की ने इसका विरोध किया और वह पहले व्यक्ति के पास लौट गई। बाद में उत्पीड़न और धमकियों से परेशान होकर लड़की ने जून 2020 में आत्महत्या कर ली।
NHRC ने इस कुप्रथा पर रोक के लिए विशेष कानून बनाने की सिफारिश की है। आयोग के अनुसार, महिलाओं को ऐसे समझौतों के लिए मजबूर करने वालों पर मानव तस्करी की धाराओं में मुकदमा चलाया जाना चाहिए, जबकि नाबालिगों के मामलों में पॉक्सो कानून के तहत सख्त कार्रवाई जरूरी है। मंत्रालय ने भी माना है कि यह प्रथा महिलाओं के लिए अपमानजनक है और इसे खत्म करना आवश्यक है।
नाता प्रथा मूलरूप से विधवा या परित्यक्ता महिलाओं के पुनर्विवाह को सरल बनाने की परंपरा थी। समय के साथ यह पैसों के लेन-देन पर आधारित होकर महिलाओं की खरीद-फरोख्त और शोषण का जरिया बनने से कुरीति बन गई। कई राज्यों में ऐसी प्रथा प्रचलित है। इस प्रथा के नाम पर लड़कियों-महिलाओं का शोषण होता है।