Internet Shutdown In Rajasthan : गृह विभाग ने वर्ष 2018 में संभागीय आयुक्तों को दिए थे परीक्षाओं में इंटरनेट बंद नहीं करने के आदेश।इंटरनेट बंद नहीं करने के सरकार के दो आदेश, उड़ रही धज्जियां।प्रदेश में नेटबंदी बन गया ट्रेंड, नकल रोकने के दूसरे विकल्पों पर काम ही नहीं हो रहा।सवाल...जिम्मेदारों पर एक्शन कौन ले।
जयपुर । जम्मू-कश्मीर के हालात को छोड़ दें तो इंटरनेट बंदी में राजस्थान देश Internet Shutdown In Rajasthan में पहले नंबर पर है। परीक्षाओं के दौरान इंटरनेट बंद नहीं करने के खुद राज्य सरकार (गृह विभाग) के आदेश भी हैं। इसी से जुड़े एक मामले में वर्ष 2018 में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार बता चुकी है कि भविष्य में परीक्षा को लेकर इंटरनेट बंद नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद अपनी सहूलियत के लिए लगातार इंटरनेट शटडाउन को ट्रेंड बना लिया है। न जनता की फिक्र और न ही व्यापार की। फिर भी न नकल रुक रही है, न ही पेपर आउट होने की घटनाएं।
जबकि, दूसरे राज्यों में परीक्षा के नाम पर इस स्तर पर इंटरनेट बंद नहीं किया जा रहा। यही कारण है कि पिछले आठ साल में प्रदेश में 76 बार इंटरनेट बंद किया गया, जबकि उत्तरप्रदेश में तुलनात्मक रूप में केवल 29 बार इंटरनेट शटडाउन हुआ। वहीं, 15 राज्यों में तो यह आंकड़ा दहाई से भी नीचे है। यह हालात तब हैं, जब इंटरनेट दिनचर्या का मुख्य हिस्सा बन चुका है।
गौर करने वाली बात यह है कि जम्मू-कश्मीर के मामले में आए उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद गृह विभाग ने फिर संभागीय आयुक्तों को इंटरनेट बंदी पर निर्णय लेने का अधिकार दिया। परीक्षा में इंटरनेट बंद करने का निर्णय शायद ही उच्चतम न्यायालय के आदेश के दायरे में आए, लेकिन अफसरशाही न्यायालय की भी परवाह नहीं कर रही है। कानून-व्यवस्था बिगडऩे की आड़: गृह विभाग ने पिछले माह परामर्श जारी किया कि परीक्षा के दौरान फेक न्यूज, दुर्घटना की अफवाह, पेपर लीक जैसी अफवाह से कानून-व्यवस्था बिगडऩे की स्थिति बन सकती है। इसलिए संभागीय आयुक्तों को स्थिति का आकलन कर इटरनेट बंद करने का निर्णय लेने की छूट दे दी।
आदेश-दर-आदेश पर सब दरकिनार-
आदेश 1 : गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 8 अक्टूबर, 2018 को राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव को पत्र लिखा था। इसमें हाईकोर्ट के आदेश और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के प्रावधान का हवाला देते हुए इंटरनेट बंद नहीं करने के लिए कहा। इसमें साफ लिखा गया कि इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत टेलीकॉम सेवाओं का निलंबन केवल लोक आपात या जन सुरक्षा के लिए ही किया जा सकता है। परीक्षा का आयोजन न तो लोक आपात में आता है और न ही लोक सुरक्षा के दायरे में। परीक्षा पूरे वर्ष होने वाली एक सतत प्रक्रिया है। हाईकोर्ट ने भी इसे गंभीरता से लिया है। ऐसी स्थिति में परीक्षा में इंटरनेट बंद करना न केवल विधि मान्य नहीं है, बल्कि आम जनजीवन को भी प्रभावित करता है।
आदेश 2 : गृह विभाग ने 22 अक्टूबर, 2018 में सभी संभागीय आयुक्तों को पत्र लिखा। इसमें राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में इंटरनेट बंद नहीं करने से जुड़े निर्देश का हवाला देते हुए साफ किया गया कि भविष्य में किसी भी तरह की परीक्षा में इंटरनेट बंद नहीं किया जाए।
देश-प्रदेश: नेटबंदी में टॉप 5 -
जम्मू-कश्मीर - 316
राजस्थान- 76
उत्तरप्रदेश -30
हरियाणा- 18
पश्चिम बंगाल-12
सीकर -16
जयपुर -15
उदयपुर- 11
भीलवाड़ा- 08
भरतपुर -07
ये हैं विकल्प...लेकिन अपना नहीं रहे-
संबंधित एप्लीकेशन बंद क्यों नहीं— लगातार मांग उठती रही है कि आखिर सोशल मीडिया साइट या एप्लीकेशन को ही बंद करने का मैकेनिज्म क्यों नहीं लाया जा रहा।
सख्ती क्यों नहीं— पुलिस और जिला प्रशासन की बड़ी टीम है। परीक्षा के दौरान चैकिंग के लिए अत्याधुनिक उपकरण हैं। ऐसी मशीनरी होने के बाद भी उसका प्रभावी उपयोग नहीं।
सुप्रीम कोर्ट कह चुका... जम्मू-कश्मीर से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि आज के दौर में इंटरनेट लोगों के मौलिक अधिकारों में शामिल हो गया है। ऐसे में बेवजह इंटरनेट बंद नहीं किया जा सकता है।