वेनेजुएलाई के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर ड्रग्स कार्टेल चलाने का आरोप है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद अब दुनिया भर की नजर वहां के कच्चे तेल भंडार पर है। जानिए, वेनेजुएलाई कच्चे तेल को लेकर क्या है भारतीय कंपनियों का रुख
Venezuela crude oil: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के चेयरमैन ए एस साहनी ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियां बेहद सक्षम हैं। अगर हमें वेनेजुएला का कच्चा तेल उपलब्ध होता है तो हम उसे प्रोसेस कर सकते हैं। ANI संग बातचीत में सहनी ने कहा कि इंडियन ऑयल ने पहले भी वेनेजुएलाई कच्चा तेल प्रोसेस किया है। हम इसे दोबारा प्रोसेस कर सकते हैं।
ए एस साहनी ने कहा कि स्थिर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और भारत की मजबूत आर्थिक विकास तेल उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए एक अच्छा माहौल बना रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लंबे समय तक क्लीन एनर्जी पर फोकस रहेगा। सहनी ने कहा कि भारत बहुत तेजी से बढ़ रहा है और हर कोई भारत के साथ बिजनेस करने में दिलचस्पी रखता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से कच्चा तेल 60-65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में ट्रेड कर रहा है। पिछले छह महीनों में ज्यादातर समय यह 60 डॉलर या उससे कम था। यह एक अच्छा जोन है जहां आर्थिक ग्रोथ भी हो रही है और कच्चे तेल के विक्रेता भी खुश हैं।
भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपनी उर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। IOCL अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85-87 प्रतिशत इंपोर्ट करता है। मौजूदा कीमत आर्थिक स्थिरता के लिए मददगार है।
रिफाइनिंग मार्जिन पर इंडियन ऑयल के चेयरमैन साहनी ने कहा- 'मार्जिन सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों से तय नहीं होता है। रिफाइनिंग मार्जिन एक बहुत बड़ा शब्द है। यह आखिरकार इंटरनेशनल मार्केट में क्रैक से प्रभावित होता है। आज, क्रैक ठीक काम कर रहे हैं। वे सामान्य हो गए हैं।'
सहनी ने कहा कि सरकार ने एनर्जी सेक्टर को पूरा सपोर्ट दिया है। पॉलिसी के मामले में कोई दिक्कत नहीं है। जो भी सपोर्ट चाहिए था, वह पहले ही दिया जा चुका है। अब यह हम पर निर्भर है कि हम एफिशिएंसी बढ़ाकर, लागत कम करके और सप्लाई चेन को ऑप्टिमाइज करके प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार करें।
वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई के बाद दुनिया में कच्चे तेल के व्यापार को लेकर लंबी बहस छिड़ गई है। भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में यहां भी अमेरिकी कार्रवाई और उससे होने वाले प्रभावों पर मंथन का दौर चालू है। कुछ दिनों पहले भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने इस पर अपनी राय भी रखी थी।
हर्ष श्रृंगला ने कहा कि भारत ने वेनेजुएला में लगभग 6 बिलियन डॉलर निवेश किए थे। वेनेजुएला का क्रूड यानी कच्चा तेल भारत आयात किया जाता रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से वेनेजुएलाई तेल का आयात बंद हो गया था। इसलिए भारतीय तेल विपनन कंपनियों को वेनेजुएला में दिलचस्पी है।
यह कैसे काम करेगा? हमारी कंपनियों और हमारे इंटरेस्ट के लिए क्या विकल्प हैं? उस पर भी हमें ध्यान से देखना होगा, लेकिन यह साफ है कि वेनेजुएला बड़े तेल उत्पादक के नजरिए से एक जरूरी देश है। इसके पास दुनिया में सबसे बड़ा तेल रिजर्व है। उन्होंने कहा कि इसलिए भारत को यह सही हालात बनने तक इंतजार करना होगा।