ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इस तनाव के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। सरकार के इस फैसले से सीधे तौर पर किसे होगा फायदा, आइए विस्तार से समझते हैं...
Iran-Israel War: ईरान और US-इजरायल के बीच जारी जंग का आज 28वां दिन है। इस संघर्ष की वजह से दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से गुजर रहे हैं। ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। वैश्विक स्तर पर उपजे ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम दी है। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की तेजी (Cude oil price in global market) के कारण सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती की है।
एडिशनल एक्साइज ड्यूटी घटाने के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर इसकी जानकारी दी है। हरदीप पुरी ने X पर लिखा- ग्लोबल मार्केट में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के इस दौर में तेल कंपनियों के भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर) कम करने के लिए सरकार ने अपने टैक्सेशन राजस्व पर बड़ा असर सहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं, इसलिए निर्यात करने वाली रिफाइनरियों पर निर्यात शुल्क भी लगाया है। अब विदेशी देशों को निर्यात करने वाली किसी भी रिफाइनरी को निर्यात कर देना होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस कदम से तेल कंपनियों के घाटे को कम करने और घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी कम होने के बाद पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपए प्रति लीटर से घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर से घटकर 0 हो गया है।
एक्साइज ड्यूटी कटौती के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अहम जानकारी दी है। वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से सुरक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा- पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से सुरक्षा मिलेगी। PM मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाया जाए। वित्त मंत्री ने आगे कहा कि डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। इससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस संबंध में संसद को सूचित कर दिया गया है।
पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती का मतलब है कि केंद्र सरकार ने खुदरा बिक्री से होने वाले बड़े राजस्व को छोड़ दिया है, ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुछ राहत मिल सके। अगर यह कदम नहीं उठाया जाता तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को खुदरा कीमतें बढ़ानी पड़तीं, जिससे अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का असर पड़ता। इसके अतरिक्त तेल मार्केटिंग कंपनियों को ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों को खुद झेलता पड़ता। ऐसी स्थिति में मार्केटिंग कंपनियों की वित्तीय स्थिति बुरा असर पड़ता।
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती के साथ ही विदेश में जल के निर्यात पर 21.5 रुपए और एविएशन टर्बाइन फ्यूल(Aviation Turbine Fuel) पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है। इस निर्णय से सरकार को SAED में कटौती से होने वाले नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल पर कुल एक्साइज ड्यूटी पहले 21.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 17.8 रुपए प्रति लीटर थी। इसमें एडिशनल एक्साइज ड्यूटी का बड़ा हिस्सा था। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती के बाद पेट्रोल पर कुल एक्साइज 11.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 7.8 रुपए प्रति लीटर रह गई है।
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध शुरू होने से बाद से ग्लोबल मार्केट में तेल के दामों में काफी उछाल आया है। TOI ने एमके ग्लोबल की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के हवाले से बताया कि यह कटौती वर्तमान कीमतों पर तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) के पेट्रोल और डीजल बिक्री के वार्षिक घाटे का करीब 30-40% तक कवर कर लेंगी। रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, एक्साइज ड्यूटी में 1 रुपए प्रति लीटर की कटौती से सरकार को सालाना करीब 15,000-16,000 करोड़ रुपए का राजस्व घाटा होता है। इसके अतरिक्त 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती से यह घाटा करीब 1.5-1.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। ICRA ने यह भी कहा कि अगर कच्चा तेल $100-105 प्रति बैरल के औसत पर रहा तो OMC को पेट्रोल पर 11 रुपए और डीजल पर 14 रुपए प्रति लीटर का घाटा होगा।
ईंधन पर खुदरा विक्रेताओं की वित्तीय स्थिति पर पहले से ही दबाव दिख रहा था। पब्लिक सेक्टर की OMC ने हाल ही में प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें बढ़ाईं, लेकिन आम भारतीयों द्वारा इस्तेमाल होने वाले रेगुलर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अपरिवर्तित रखीं। निजी क्षेत्र की ईंधन खुदरा कंपनी नयारा एनर्जी ने हालांकि इनपुट लागत बढ़ने के कारण पेट्रोल की कीमत 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल की 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दीं। नयारा भारत में सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा कंपनी है, लेकिन इसका बाजार हिस्सा सिर्फ करीब 7% है। तीन पब्लिक सेक्टर ओएमसी का कुल हिस्सा 90% है और वे प्रभावी रूप से ईंधन मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करती हैं। यह कदम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत नहीं देगा, लेकिन ईंधन कंपनियों को घाटे से बचाने और खुदरा कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा।
उत्पाद शुल्क में कटौती का उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीधे तौर पर कमी किए बिना, ऑटो ईंधन पर तेल कंपनियों के नुकसान को कम करना है। निर्यात शुल्क के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- इससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने से बाद से क्रूड ऑयल के दाम में काफी उछाल आया है। इसको लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर लिखा- पिछले 1 महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। परिणामस्वरूप, दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है। उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।