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पश्चिम एशिया में शांति के लिए भारत की पहल का स्वागत करेगा ईरान, BRICS की साझा घोषणा पर इस देश ने लगाया अड़ंगा

Iran Welcomes Indian Initiative: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच ईरान ने भारत से शांति पहल की अपील की है। ईरान ने कहा कि भारत की किसी भी कूटनीतिक पहल का स्वागत किया जाएगा। वहीं ब्रिक्स की साझा घोषणा पर एक सदस्य देश के विरोध से सहमति बनने में अड़चन आई है।

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भारत

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Rahul Yadav

May 14, 2026

Iran Welcomes Indian Initiative

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी (AI Generated Image)

India Iran Peace Initiative West Asia: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने भारत से शांति बहाली की दिशा में बड़ी पहल की उम्मीद जताई है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर भारत क्षेत्र में युद्ध खत्म कराने और स्थिरता बहाल करने के लिए कोई पहल करता है तो तेहरान उसका स्वागत करेगा।

वहीं ब्रिक्स देशों की साझा घोषणा को लेकर भी अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। ईरान ने आरोप लगाया है कि समूह का एक सदस्य देश संयुक्त बयान में ईरान की निंदा शामिल कराने पर अड़ा हुआ है जिससे सहमति बनने में दिक्कत आ रही है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची (Seyed Abbas Araghchi) ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। 14 और 15 मई को होने वाली इस बैठक से पहले ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने पत्रकारों से बातचीत में कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

भारत की भूमिका को अहम मान रहा ईरान

ग़रीबाबादी ने कहा कि भारत एक बड़ा, प्रभावशाली और स्वतंत्र देश है जिसकी भूमिका पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने में अहम हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ईरान, इजरायल या अमेरिका के बीच का संघर्ष नहीं है बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील और स्वतंत्र देशों की जिम्मेदारी है कि वे युद्ध दोबारा भड़कने से रोकने के लिए प्रयास करें। ईरानी उप विदेश मंत्री ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर इस दिशा में पहल करने का अनुरोध भी किया है।

ईरान का कहना है कि क्षेत्र में जारी अस्थिरता का असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर पड़ रहा है। ऐसे में भारत की संभावित कूटनीतिक पहल को तेहरान सकारात्मक नजरिए से देख रहा है।

ब्रिक्स की साझा घोषणा पर फंसा मामला

ब्रिक्स बैठक से पहले ईरान ने समूह के भीतर मतभेद होने का भी संकेत दिया। ग़रीबाबादी ने कहा कि एक सदस्य देश संयुक्त घोषणा में ईरान की आलोचना या निंदा शामिल कराने की कोशिश कर रहा है जिसके कारण साझा बयान को अंतिम रूप देने में मुश्किल आ रही है।

हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन उनके बयान से संकेत मिला कि वह संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) की ओर इशारा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में ईरान का केवल एक पड़ोसी देश सदस्य है और उम्मीद है कि वह लचीलापन दिखाएगा।

ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान चाहता है कि भारत की अध्यक्षता में होने वाली ब्रिक्स बैठक सफल रहे। उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि ब्रिक्स अंदर से बंटा हुआ है।

पड़ोसी देशों पर भी लगाए आरोप

ईरानी उप विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरान के पास ऐसे दस्तावेज हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ पड़ोसी देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस मुद्दे पर संबंधित देशों को चेतावनी भी दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी मीडिया में जो नई रिपोर्टें सामने आई हैं उनकी जानकारी ईरान को पहले से थी। हालांकि उन्होंने किसी देश का स्पष्ट नाम नहीं लिया लेकिन बातचीत के दौरान संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब का संदर्भ सामने आया।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा शुल्क

ईरान ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अब शुल्क देना पड़ सकता है। ग़रीबाबादी ने कहा कि ईरान और ओमान इस समुद्री मार्ग पर जहाजों को सुरक्षा, नेविगेशन और बचाव सेवाएं उपलब्ध कराते हैं और अब इन सेवाओं के बदले शुल्क लेने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह कोई टोल टैक्स नहीं होगा, बल्कि सेवाओं के बदले लिया जाने वाला शुल्क होगा। ईरान इस संबंध में प्रोटोकॉल और नियम तय कर रहा है और इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप तथा गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से लागू किया जाएगा।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद से अब भी कई भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं। ऐसे में ईरान के इस फैसले का असर भारतीय शिपिंग और व्यापार पर भी पड़ सकता है।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। भारत के तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। इसके अलावा लाखों भारतीय खाड़ी देशों में काम करते हैं और भारत को मिलने वाली बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

यही वजह है कि भारत लगातार पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की वकालत करता रहा है। अब ईरान की ओर से भारत की भूमिका को लेकर जताई गई उम्मीदों ने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा अहम बना दिया है। आने वाले दिनों में ब्रिक्स बैठक और भारत की कूटनीतिक रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।