
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग (Photo-IANS)
Business Leaders: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आगामी चीन यात्रा को लेकर पूरी दुनिया में सुर्खियों में हैं। इस बार यह दौरा सिर्फ एक राजनीतिक मुलाकात नहीं होने वाला है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी आर्थिक रणनीति छिपी है। व्हाइट हाउस ने हाल ही में उन शीर्ष बिजनेस लीडर्स की एक आधिकारिक सूची जारी की है, जो इस बेहद महत्वपूर्ण यात्रा में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कदम से कदम मिला कर चीन जाएंगे। इस लिस्ट के सामने आते ही वैश्विक शेयर बाजारों और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी की गई इस हाई-प्रोफाइल सूची में 16 सबसे शक्तिशाली अमेरिकी कंपनियों के सीईओ शामिल हैं। इनमें टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क, एप्पल के सीईओ टिम कुक, ब्लैकरॉक के प्रमुख लैरी फिंक और ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्ज़मैन जैसे दिग्गज नाम सबसे आगे हैं। इनके अलावा गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन, सिटीग्रुप की जेन फ्रेजर, बोइंग के केली ऑर्टबर्ग और मास्टरकार्ड के माइकल मीबैक भी इस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का अहम हिस्सा हैं। वीजा, जीई, माइक्रोन, क्वालकॉम, कारगिल, मेटा, इलुमिना और कोहेरेंट जैसी दिग्गज कंपनियों के मुखिया भी इस लिस्ट में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि यह लिस्ट अंतिम नहीं है। यात्रा शुरू होने तक इसमें अमेरिका के कुछ और बड़े कॉरपोरेट नाम भी जुड़ सकते हैं।
इस खबर के बाहर आते ही वित्तीय बाजारों में जबरदस्त हलचल है। निवेशकों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दुनिया के दो सबसे बड़े आर्थिक दिग्गजों (अमेरिका और चीन) के बीच होने वाली इस बैठक को बाजार अभी भी कम आंक रहा है। इतने सारे टॉप सीईओ का एक साथ चीन जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि व्यापार, टैरिफ और तकनीक को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ बहुत बड़े और ऐतिहासिक समझौते हो सकते हैं।
बाजार के विशेषज्ञ अब इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि क्या ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच किसी नई 'ट्रेड डील' पर मुहर लगेगी? एप्पल और टेस्ला जैसी कंपनियों का चीन में बहुत बड़ा निर्माण और उपभोक्ता बाजार है, ऐसे में मस्क और कुक की उपस्थिति नीतिगत बदलावों की ओर इशारा कर रही है। आने वाले दिनों में और कौन से सीईओ इस लिस्ट में शामिल होते हैं, यह देखना भी काफी दिलचस्प होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का एक धड़ा इसे ट्रंप का 'शक्ति प्रदर्शन' भी मान रहा है। इतने सारे अमेरिकी उद्योगपतियों को सीधे बीजिंग ले जाकर, अमेरिका चीन को अपनी आर्थिक और तकनीकी ताकत का सीधा अहसास कराना चाहता है। दूसरी ओर, यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह कदम चीन के साथ चल रहे ट्रेड वॉर को खत्म कर एक नई व्यावसायिक शुरुआत करने की दिशा में उठाया गया है?
Updated on:
13 May 2026 08:07 pm
Published on:
13 May 2026 08:06 pm
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