13 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ताइवान में बजे खतरे के सायरन! ड्रैगन ने एक साथ भेजे फाइटर जेट्स और जंगी जहाज, क्या युद्ध की है तैयारी?

Taiwan-China conflict : ताइवान ने अपने हवाई और समुद्री रक्षा क्षेत्र (ADIZ) के पास चीन के 2 सैन्य विमानों और 8 जहाजों की घुसपैठ पकड़ी है। चीनी सेना (PLA) की इस उकसावे वाली कार्रवाई के बाद ताइवानी सशस्त्र बल हाई अलर्ट पर हैं और जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

3 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

May 13, 2026

Taiwan detects 2 sorties of Chinese military aircraft

प्रतीकात्मक चित्र। ( फोटो: ANI)

Taiwan ADIZ violation: ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने अपने हवाई और समुद्री क्षेत्र के आसपास चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की घुसपैठ की ताजा घटनाएं होने की पुष्टि की है। रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह 6 बजे (स्थानीय समयानुसार) तक ताइवान के क्षेत्रीय जल और हवाई क्षेत्र के इर्द-गिर्द चीनी सैन्य विमानों के दो समूह, चीन की नौसेना (पीएलएएन) के सात जहाज और एक अन्य आधिकारिक पोत देखे गए।

उन्होंने स्थिति की बारीकी से निगरानी की

जानकारी के अनुसार हालात की गंभीरता को बढ़ाते हुए, इन दो विमान समूहों में से एक ने ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) की सीमा लांघी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उनकी सेना (ROC आर्म्ड फोर्सेज) ने तुरंत इस पूरी गतिविधि का संज्ञान लिया। उन्होंने स्थिति की बारीकी से निगरानी की और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित जवाबी कदम भी उठाए।

12 मई को भी इसी तरह की सैन्य गतिविधियां दर्ज की गई थीं

यह कोई इकलौती घटना नहीं है। इससे ठीक पहले, 12 मई को भी इसी तरह की सैन्य गतिविधियां दर्ज की गई थीं। उस दिन सुबह 6 बजे तक ताइवान ने अपनी सीमा के पास चीनी सेना के नौ विमान समूहों, सात नौसैनिक पोतों और एक आधिकारिक जहाज की मौजूदगी का पता लगाया था। वहीं 12 मई की घटना में, नौ में से पांच चीनी विमान समूहों ने ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी रक्षा क्षेत्र (ADIZ) में अतिक्रमण किया था, जिसके जवाब में ताइवान की सेना ने कड़ी निगरानी रखते हुए रक्षात्मक उपाय किए थे।

चीन और ताइवान के बीच विवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चीन और ताइवान के बीच का यह गतिरोध अत्यंत जटिल है और इसके तार गहरे ऐतिहासिक, वैधानिक और राजनीतिक दावों से जुड़े हुए हैं। बीजिंग प्रशासन दृढ़ता से यह दावा करता है कि ताइवान चीन का ही एक अभिन्न अंग है। यह दावा चीन की राष्ट्रीय नीति का मुख्य आधार है, जिसे उनके घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए जाने वाले बयानों से बल मिलता है।

ताइवान की यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ी बहस का मुद्दा

इसके विपरीत, ताइवान की जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। ताइवान एक स्वतंत्र इकाई के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। उसकी अपनी चुनी हुई सरकार है, अपनी स्वतंत्र अर्थव्यवस्था है और अपनी खुद की एक मजबूत सेना है। 'यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया' के अनुसार, ताइवान की यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ी बहस का मुद्दा है। यह विवाद राष्ट्रीय संप्रभुता, आत्मनिर्णय के अधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून में गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों की कड़ी परीक्षा लेता है।

इतिहास के पन्नों में ताइवान का सफर

इस पूरे विवाद की जड़ें सदियों पुरानी हैं, जिसे निम्नलिखित कालखंडों में समझा जा सकता है:

1683 का विलय: चीन का ताइवान पर दावा 1683 की उस घटना से उपजा है जब किंग राजवंश ने मिंग राजवंश के वफादार शासक कोक्सिंगा को पराजित करके इस द्वीप पर अपना अधिकार जमाया था। हालांकि, उस समय भी ताइवान पर किंग राजवंश का नियंत्रण बहुत सीमित था।

1895 का बदलाव: स्थिति में बड़ा बदलाव वर्ष 1895 में आया। प्रथम चीन-जापान युद्ध में हार के बाद, किंग राजवंश ने ताइवान द्वीप को जापान को सौंप दिया। इसके परिणामस्वरूप ताइवान 50 वर्षों तक जापानी साम्राज्य का एक उपनिवेश बना रहा।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद : जब द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की हार हुई, तो ताइवान को वापस चीन के नियंत्रण में दे दिया गया। लेकिन इस संप्रभुता हस्तांतरण को कभी किसी औपचारिक संधि के तहत स्पष्ट नहीं किया गया।

1949 का चीनी गृहयुद्ध : 1949 में चीनी गृहयुद्ध का अंत हुआ। मुख्य भूमि चीन पर कम्युनिस्टों का कब्जा हुआ और 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' (PRC) की स्थापना हुई। वहीं, 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' (ROC) की सरकार सिमटकर ताइवान आ गई। ताइवान में बैठी ROC सरकार ने पूरे चीन पर शासन का दावा किया, जबकि बीजिंग की PRC ने ताइवान पर अपना दावा ठोका।

ताइवान हर व्यावहारिक अर्थ में एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र

बहरहाल, इसी घटनाक्रम ने 'दोहरी संप्रभुता' के उस जटिल विवाद को जन्म दिया जो आज तक अनसुलझा है। आज ताइवान हर व्यावहारिक अर्थ में एक संप्रभु और स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन मुख्य भूमि चीन (PRC) के साथ किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव से बचने के लिए, उसने अब तक अपनी औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा करने से परहेज किया है।