ईरान और US-इजरायल के बीच जारी संघर्ष की वजह से पश्चिम एशिया में तनाव है। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से भारत समेत दुनिया के कई देशों में होने वाली गैस-तेल की सप्लाई बाधित हुई है। ग्लोबल स्तर पर उपजे इस ऊर्जा संकट के बीच भारत होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होने वाली सप्लाई का विकल्प तलाश रहा है।
Iran and US-Israel Conflict: ईरान और US-इजरायल के बीच शुरू हुई जंग का आज 28वां दिन है। इस जंग की वजह से भारत सहित कई देशों में होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होने वाली गैस-तेल की सप्लाई बाधित हुई है। इसकी वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दाम (crude oil prices in global market) बढ़ गए हैं। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (crude oil) के दाम 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत होर्मुज स्ट्रेट(Strait of Hormuz) पर निर्भरता करने का विकल्प तलाश रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने के लिए भारत, अपने पुराने मित्र रूस से डील कर रहा है।
न्यूज एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया(west asia) में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने रूस से LNG (Liquefied Natural Gas) डील की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार भारत और रूस के बीच सीधे LNG व्यापार को फिर से शुरू करने के प्रयास तेज हुए हैं।
LNG व्यापार के संबंध में 19 मार्च को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में रूस के उप ऊर्जा मंत्री और भारत के पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी शामिल हुए थे। सूत्रों के अनुसार, LNG डील की बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो आने वाले कुछ हफ्तों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि भारत ने रूस से LNG खरीद जारी रखने के लिए अमेरिका से विशेष छूट की मांग की है। फिलहाल अमेरिका ने रूसी तेल और LPG पर कुछ छूट दे है, इसलिए भारत को उम्मीद है कि LNG खरीद के मामले में भी राहत मिल सकती है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष (Middle East Conflic) की वजह से वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित हुई है। ऐसी परिस्थिति में भारत ने अपने पुराने दोस्त रूस से लगातार व्यापारिक संबंध बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इस साल की शुरुआत में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम की थी, लेकिन हालात बदलने के साथ नई रणनीति अपनाई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अपने पुराने दोस्त रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर कुल आयात का करीब 40% तक कर सकता है। यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत पहले ही रूस से करीब 44 अरब डॉलर का तेल खरीद चुका है। यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस के किफायती कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार बन गया। इसके साथ ही भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीतिक विवाद का बड़ा कारण बना। बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता है। साल 2025 में भारत ने रूस से करीब 44 बिलियन डॉलर का कच्चा तेल खरीदा है।