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ईरान-इजरायल युद्ध: तनाव के बीच S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत

ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ऐसे समय में भारत की सैन्य ताकत में इजाफा हुआ है। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद को मंजूरी मिल गई है।

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Mar 27, 2026
एयर डिफेंस सिस्टम S-400(फोटो-ANI)

Iran–Israel War: ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में उपजे तनाव के बीच भारत ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए अतरिक्त S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद को मंजूरी मिल गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई बैठक में अतिरिक्त S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद का प्रपोजल स्वीकार हो गया है। बता दे कि हाल ही में डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 5 अतिरिक्त S-400 मिसाइल यूनिट की खरीद को मंजूरी दी थी। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की बैठक में भेजा गया था। DAC ने S-400 मिसाइ यूनिट के खरीद प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है।

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S-400 की आधिकारिक खरीद प्रक्रिया शुरू

डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने अतरिक्त S-400 मिसाइल यूनिट खरीदने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी बाद आधिकारिक तौर पर अतिरिक्त S-400 की खरीद प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि, इस मिसाइल सिस्टम की खरीद की अंतिम मंजूरी PM मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में मिलेगी। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के समय S-400 मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया था।

ऑपरेशन सिंदूर के समय इस यूनिट ने 300 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के एक एयरक्राफ्ट को हिट करके अब तक का सबसे लंबी दूरी का किल रिकॉर्ड बनाया था। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 3, S-400 मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं। भारत को पिछली डील में तय हुईं 5 में से 2 स्क्वाड्रन की डिलीवरी का इंतजार है। इस साल के अंत तक बची हुई 2, S-400 मिसाइल यूनिट मिलने की संभावना है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अगले 2 से 3 महीनों में चौथी यूनिट मिल सकती है। डील की आखिरी, यानी कि 5वीं यूनिट इस साल के अंत तक मिलने की संभावना है।

2018 में हुआ था S-400 मिसाइल सिस्टम का सौदा

भारत ने साल 2018 में रूस से लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम S-400 खरीदने का समझौता किया था। भारत ने रूस से साल 2018 में करीब 39,000 करोड़ रुपए में 5, S-400 सिस्टम खरीदने की डील की थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसकी डिलीवरी में देरी हुई। पहली स्क्वाड्रन भारत को दिसंबर 2021 में मिली थी, जबकि दूसरी अप्रैल 2022 में और तीसरी यूनिट फरवरी 2023 में डिलीवर हुई। साल 2024 में रक्षा मंत्री की रूस यात्रा के दौरान भी बची हुई 2 स्क्वाड्रन की डिलीवरी को लेकर चर्चा हुई थी। ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने S-400 की बैटरियों के लिए एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी थी। आमतौर पर किसी भी सैन्य उपकरण की खरीद में मेंटेनेंस शामिल होता है, लेकिन उस कॉन्ट्रैक्ट को समय-समय पर रिन्यू भी कराया जाता है।

क्यों खास है S-400?

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान के खिलाफ एयर डिफेंस सिस्टम S-400 का इस्तेमाल किया था। इसका लॉन्ग रेंज रडार 600 किलोमीटर दूर से आने वाले दुश्मन के हवाई खतरों को डिटेक्ट कर सकता है। यह यूनिट एक साथ 100 से ज्यादा फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता रखती है। यह यूनिट स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट, टोही विमान, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट, आर्म्ड ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को 400 किलोमीटर तक की दूरी से इंटरसेप्ट कर सकती है।

S-400 से 400, 250, 120 और 40 किलोमीटर रेंज की 4 अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है, जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही यह सिस्टम ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है।

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