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ईरान इजरायल जंग की जद में आया हिंद महासागर, हिंद नाम होने पर भी क्यों नहीं है भारत का इस पर नियंत्रण, जानें

ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के भारतीय महासागर में डूबने की घटना ने समुद्री अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नाम भारत का होने के बावजूद महासागर पर भारत का नियंत्रण सीमित है।
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Mar 06, 2026
Indian Ocean
हिंद महासागर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भारतीय महासागर का नाम भारत के नाम पर जरूर है, लेकिन इस विशाल समुद्री क्षेत्र पर भारत का पूरा नियंत्रण नहीं है। हाल ही में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena के डूबने की घटना ने इस सवाल को फिर से चर्चा में ला दिया है। 4 मार्च को अमेरिकी नौसेना ने श्रीलंका के पास समुद्र में ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाया। यह जहाज आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित सैन्य अभ्यास से लौट रहा था। इस घटना ने यह बहस तेज कर दी है कि आखिर भारतीय महासागर में किसका कितना अधिकार है और भारत की भूमिका क्या है।

हाई सीज से गुजर रहा था IRIS Dena

रिपोर्ट्स के अनुसार यह हमला श्रीलंका के गाले शहर से लगभग 40 नॉटिकल माइल दक्षिण में हुआ। यह क्षेत्र तकनीकी रूप से श्रीलंका के समुद्री आर्थिक क्षेत्र में आता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत यहां नौसेना की आवाजाही की अनुमति रहती है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन (PENTAGON) ने हमले का वीडियो जारी किया जिसमें युद्धपोत के पिछले हिस्से में जोरदार विस्फोट दिखाई देता है। कुछ ही समय बाद जहाज समुद्र में डूबता नजर आया। बताया जा रहा है कि IRIS Dena उस समय अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग से गुजर रहा था, जिसे आम तौर पर हाई सीज कहा जाता है।

Indian Ocean का नाम भारत पर क्यों पड़ा

भारतीय महासागर दुनिया का एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है। इसकी मुख्य वजह भारत की भौगोलिक स्थिति है। भारतीय उपमहाद्वीप समुद्र में आगे की ओर फैला हुआ है और एशिया, अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया को समुद्री मार्गों से जोड़ता है। यही कारण है कि इतिहास में इस विशाल समुद्र को भारतीय महासागर कहा जाने लगा। इसका क्षेत्रफल लगभग 7 करोड वर्ग किलोमीटर से अधिक है। हालांकि नाम भारत से जुड़ा होने के बावजूद यह समुद्र किसी एक देश के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसे वैश्विक समुद्री क्षेत्र माना जाता है।

UNCLOS लागू करता है समुद्री कानून

समुद्रों के अधिकार और नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) लागू है, जिसे 1982 में स्वीकार किया गया था। इसके अनुसार किसी भी देश का पूर्ण अधिकार उसके तट से 12 नॉटिकल माइल तक के क्षेत्र पर होता है, जिसे टेरिटोरियल सी कहा जाता है। इसके बाद 24 नॉटिकल माइल तक कंटिगुअस जोन और 200 नॉटिकल माइल तक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन यानी EEZ होता है। भारत का EEZ लगभग 23 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जहां भारत को तेल, गैस और मत्स्य संसाधनों की खोज और प्रबंधन का अधिकार है। इसके बाहर का समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय माना जाता है जहां सभी देशों को नौवहन की स्वतंत्रता होती है।

Updated on:
06 Mar 2026 02:23 pm
Published on:
06 Mar 2026 02:23 pm
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