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Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के चढ़ावे पर उठे सवाल, जयराम रमेश ने पूछा- 105 घटनाओं के बाद भी बड़े जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

Ayodhya Ram Mandir News: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब केवल पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने जांच के दायरे, मंदिर प्रबंधन की जवाबदेही और दान की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
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Updated: 25 Oct 2026, 10:51 AM IST
Ram Mandir Donation Scam
Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर के चढ़ावे पर जयराम रमेश के सवाल, जांच और हिसाब-किताब पर उठाई आवाज (Photo-IANS)

Jairam Ramesh Questions Ram Mandir Donations: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए धन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अपनी एक्स पोस्ट के जरिए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कितनी गहराई तक हुई है। मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और दान के हिसाब पर पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है।

Ram Mandir Donation Scam: एक्स पोस्ट में जयराम रमेश ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में 'चंदा चोरी, आस्था धोखा' का नारा देते हुए मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को गंभीर मामला बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व से सवाल किया कि मंदिर प्रबंधन की निगरानी तथा वित्तीय जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

रमेश का आरोप है कि जांच में केवल कथित तौर पर पैसे निकालने वालों तक सीमित रहने के बजाय यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियां कैसे हुईं और निगरानी करने वालों की भूमिका क्या रही।

26 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, जयराम रमेश ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच के दायरे और मंदिर के चढ़ावे की गिनती करने वाली व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठाए। यह प्रतिक्रिया मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद आई।

Ram Mandir SIT Investigation: 105 घटनाओं का जिक्र, जांच पर क्यों उठ रहे सवाल?

जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित तौर पर नकदी निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों में सामने आईं। इस मामले में लगभग 80 लाख रुपये की वसूली की भी खबरें आई हैं। हालांकि, बरामद रकम को कुल कथित गड़बड़ी का अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा। इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही हो सकती है।

कांग्रेस का सवाल है कि यदि कैमरों में इतनी घटनाएं दर्ज हुईं, तो क्या जांच में केवल प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों की भूमिका देखी जा रही है या प्रशासनिक निगरानी और वित्तीय नियंत्रण की भी पड़ताल हो रही है?

82.78 करोड़ रुपये का हिसाब चर्चा में

मंदिर ट्रस्ट की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच कुल 82.78 करोड़ रुपये का चढ़ावा दिया गया। इसमें दानपात्रों से 54.79 करोड़ रुपये, नकद काउंटरों से 18.88 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 8.33 करोड़ रुपये और विदेशी योगदान के रूप में लगभग 78 लाख रुपये शामिल बताए गए।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और इसी अवधि में दर्ज दान की रकम अपने आप में चोरी का प्रमाण नहीं हैं। दान देने वाले सभी श्रद्धालु नहीं होते और चढ़ावे की राशि भी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सही निष्कर्ष के लिए दान की श्रेणीवार जानकारी, गिनती के रिकॉर्ड और वित्तीय ऑडिट का मिलान जरूरी है।

अब जवाबदेही तय करने की बारी

मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से खत्म नहीं होना चाहिए। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कितनी रकम की हेराफेरी के साक्ष्य मिले, कौन-कौन जिम्मेदार पाया गया और प्रबंधन की प्रक्रियाओं में क्या कमियां थीं।

जयराम रमेश ने इसी जवाबदेही को लेकर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अंतिम निष्कर्ष अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की बुनियाद है। इसलिए इस विवाद का सबसे अहम जवाब किसी राजनीतिक बयान में नहीं, बल्कि स्पष्ट हिसाब-किताब, निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई में मिलेगा।

Updated on:
25 Oct 2026, 10:51 AM IST
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