
जमुई मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर आज बिहार की जेलों पर नजर डालें, तो वहां बंद करीब 70 प्रतिशत लोग एक खास समुदाय से आते हैं। चाहे मामले बलात्कार के हों, जमीन पर कब्जा करने के हों या हत्या के, सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी मामलों में शामिल 70 प्रतिशत लोग उसी समुदाय से संबंधित हैं। यह भी कहा जा सकता है कि वे लोग राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आज हमारे मन में यह विचार आया कि शायद वही लोग इस घटना में कहीं न कहीं शामिल थे। लेकिन जब एक मुठभेड़ हुई, जिसमें सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनमें से एक, नंदन यादव, मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हुआ, तो हमारी पहले की आशंका को जैसे ठोस आधार मिलता हुआ दिखाई दिया।
जमुई घटना पर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि यह एक शर्मनाक घटना है और सरकार की पूरे देश में बदनामी हो रही है। जिस तरह से सरकार में बैठे लोग इस घटना का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं, उसे देखिए। भगवान न करे, अगर उनके अपने परिवार की कोई महिला इस घटना में शामिल होती, तो क्या वह तब भी यही बयान देतीं?
उन्होंने कहा कि वह लड़की बिहार की बेटी है; वह हम सभी के लिए बहन या बेटी के समान है। एसपी ने बताया है कि इस मामले में 7 से 8 लोग शामिल हैं, तो उन सभी को फांसी पर लटका दीजिए, उन्हें फांसी दे दीजिए। इसके बजाय आप हमें नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं और ‘मोरल पुलिसिंग’ की बात कर रहे हैं?
तेजस्वी यादव ने कहा कि कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया था कि कोई पटना से मुंगेर तक यात्रा कर सकता है और अगर किसी ने किसी महिला को छूने की भी हिम्मत की, तो वह इस्तीफा दे देंगे। अगर उनमें हिम्मत है और वह अपनी बात के पक्के हैं, तो इस्तीफा दें।
वहीं घटना को लेकर प्रशांत किशोर ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मैं कह रहा हूं कि जो लोग पिछले 20 वर्षों से लोगों को ‘जंगल राज’ का डर दिखाकर शासन करते आए हैं, अब उन्हें जवाब देना चाहिए। हमें बताइए, यह कैसा शासन है? वह जंगल राज था, लेकिन यह कैसा ‘मंगल राज’ है? जहाँ लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार किया जा रहा है, तथा हत्याएँ और कत्ल हो रहे हैं। यह कैसा शासन है?