
Jantar Mantar protest site: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा ने कहा कि इंडिया ब्लॉक जंतर मंतर को धरना प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने के फैसले के खिलाफ लड़ेगा। राजा ने कहा कि लोगों के पास असहमति और विरोध जताने के लिए एक जगह होनी चाहिए। सीपीआई के महासचिव ने कहा कि इस मुद्दे पर INDIA ब्लॉक की बैठक में चर्चा हुई, जिसमें तय किया गया कि सरकार को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना रद्द नहीं करने दी जाएगी।
राजा ने ANI से बातचीत में बताया कि हमने INDIA ब्लॉक की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की और तय किया कि हमें सरकार को जंतर-मंतर की अधिसूचना रद्द नहीं करने देनी चाहिए। फिर लोगों के पास अपनी असहमति, अपना विरोध जताने की जगह क्या होगी? इसलिए हमें जंतर-मंतर को लोगों के प्रदर्शन और आंदोलनों के लिए बहाल कराने की लड़ाई लड़नी होगी। यह INDIA ब्लॉक का रुख है। मुझे नहीं पता कि CJP ने लिखित में क्या दिया है या क्या वादा किया है। मुझे नहीं पता। हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा।
गौरतलब बात यह है कि जंतर-मंतर को 12 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने निर्धारित स्थल के रूप में अधिसूचना से हटा दिया था। दिल्ली पुलिस ने ऐसी गतिविधियों के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं- रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड।
इधर, विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा की गई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ संयुक्त कार्ययोजना की घोषणा की है। इसमें लोकतंत्र बचाओ अभियान के तहत प्रदर्शन, निर्वाचन आयोग तक मार्च और 1 नंवबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली शामिल है। विपक्ष के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी अब आक्रामक रुख अपनाया है। बीजेपी नेता प्रतुल शाहदेव ने चुनावी गड़बड़ियों के आरोपों और प्रदर्शन की योजनाओं को लेकर कांग्रेस और INDIA ब्लॉक की आलोचना की। शाहदेव ने कहा कि यदि उन्हें ऐसा लगता है कि तो वह पहले इस्तीफा दें।
बीजेपी नेता ने कहा कि आप बैठकें कर सकते हैं, लेकिन दोहरा मापदंड अपनाना ठीक नहीं है। कांग्रेस के पास 98-99 सांसद हैं। अगर आप दावा करते हैं कि हमने (BJP ने) 'वोट चोरी' से जीत हासिल की, तो आपको इस्तीफा दे देना चाहिए। शाहदेव ने विपक्ष के रुख को सुविधा की राजनीति बताया। उनका आरोप था कि कांग्रेस नेता जब जीतते हैं तो नतीजे स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन जब BJP जीतती है तो प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह 'सुविधा की राजनीति' है, यानी जब वे जीतें तो निष्पक्ष जीत, और जब BJP जीते तो चुनाव 'फिक्स'। अगर वाकई वोट चुराए गए होते, तो हमारी सीटें 303 से बढ़कर 350 हो जातीं, लेकिन हम 240 पर पहुंचे। NDA को बहुमत मिला है। कांग्रेस जो दावे कर रही है, वे देश में अराजकता फैलाने की सोची-समझी कोशिश हैं। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए सक्षम उम्मीदवार नहीं हैं।