
Japan Earthquake Today: मंगलवार को जापान के क्यूशू द्वीप पर उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ज़मीन के भीतर से उठे शक्तिशाली झटकों ने इमारतों को हिलाकर रख दिया। रिक्टर पैमाने पर 7.1 की तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र मुख्य रूप से कुमामोतो क्षेत्र में दर्ज किया गया। झटके इतने तेज थे कि देखते ही देखते पूरे द्वीप में खतरे के सायरन गूंजने लगे।
भूकंप के तुरंत बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने मुस्तैदी दिखाते हुए समुद्र में 1 मीटर (लगभग 3 फीट) तक ऊंची सुनामी लहरें उठने की चेतावनी जारी की है।
प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। कुमामोतो के अलावा निम्नलिखित प्रांतों में इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया है:
राहत की बात: शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, अभी तक किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की खबर नहीं है। हालांकि, तटीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों को तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
जापान भौगोलिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्र 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) पर बसा हुआ है। यह प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला एक ऐसा इलाका है जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) आपस में टकराती हैं। दुनिया के लगभग 90% भूकंप इसी पट्टी में आते हैं।
| विशेषता | विवरण |
| प्रारंभिक चेतावनी (EEW) | भूकंप की पहली पी-वेव (P-wave) महसूस होते ही मोबाइल नेटवर्क पर अलर्ट भेजता है। |
| बुलेट ट्रेन ऑटो-ब्रेकिंग | झटके महसूस होते ही 'शिंकानसेन' (Shinkansen) ट्रेनें अपने आप रुक जाती हैं। |
| भूकंप-रोधी वास्तुकला | यहां की इमारतें झटकों को सोखने (Shock Absorption) के लिए स्प्रिंग और रोलर्स पर बनाई जाती हैं। |
जापान के लिए भूकंप और सुनामी का डर नया नहीं है। मार्च 2011 में आया 9.0 तीव्रता का महा-भूकंप और उसके बाद आई विनाशकारी सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को भारी नुकसान पहुँचाया था, जिसमें 18,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
इसी वजह से जब भी रिक्टर स्केल पर आंकड़ा 7 से ऊपर जाता है, तो पूरा देश और वैश्विक एजेंसियां अलर्ट मोड में आ जाती हैं। फिलहाल राहत एवं बचाव दल (Rescue Teams) क्यूशू के कोने-कोने में सतर्क हैं और आने वाले कुछ घंटे स्थिति की स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।