
Jharkhand student protest JPSC JSSC: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का आक्रोश अब सड़कों से आगे बढ़कर सीधे सत्ता के दरवाजे तक पहुंचता दिख रहा है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर करीब तीन सप्ताह से चल रहा आंदोलन शनिवार को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। छात्र नेताओं ने रविवार को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले फूंकने का ऐलान किया है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेरने की चेतावनी दी गई है।
छात्र नेताओं का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC CGL परीक्षा और उसके परिणाम को रद्द करना, JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाओं को निरस्त करना तथा TDPL एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं को खत्म करना शामिल है। छात्र पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग पर भी अड़े हैं।
शनिवार को रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छात्र नेताओं ने आंदोलन का अगला चरण घोषित किया। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और बातचीत के रास्ते से अपेक्षित समाधान नहीं निकला, इसलिए अब आंदोलन को और तेज किया जाएगा। नेताओं ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
आंदोलनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया है। छात्र नेता रविंदर पासवान का आरोप है कि कांग्रेस सरकार में सहयोगी होने के बावजूद छात्रों की मांगों पर पर्याप्त दबाव नहीं बना रही है। इसी वजह से 24 जिलों में राहुल गांधी के पुतले जलाने का फैसला लिया गया है।
छात्र नेताओं ने सरकार को 18 अगस्त तक मांगें मानने की समयसीमा दी है। इसके बाद 20 अगस्त को बड़ी संख्या में युवाओं के मुख्यमंत्री आवास घेरने की चेतावनी दी गई है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद आंदोलन पहले ही काफी गरमा चुका है। पुलिस ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार का भरोसा दिया है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा समेत कुछ परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है, लेकिन JSSC CGL को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की गई है। यही असहमति आंदोलन की सबसे बड़ी वजहों में बनी हुई है।
छात्रों का कहना है कि जब तक सभी विवादित परीक्षाओं पर स्पष्ट निर्णय और स्वतंत्र जांच नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब सबकी नजर 18 और 20 अगस्त की तारीखों पर टिक गई है।