
Ranchi Student Protest: रांची की सड़कों पर युवाओं का आक्रोश अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राज्य के पूरे प्रशासनिक ढांचे के खिलाफ एक बड़ा सवाल बन गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्र पिछले कई दिनों से सड़कों पर डटे हुए हैं। इस बीच, विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और पुलिस बल के जरिए सच को छुपाने की कोशिश करने का तीखा आरोप लगाया है, जिससे यह पूरा प्रकरण एक गंभीर राजनीतिक संकट का रूप लेता जा रहा है।
झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्र लंबे समय से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस छात्र आंदोलन ने अब राज्य की राजनीति को भी हिलाकर रख दिया है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा कि जब विधानसभा अध्यक्ष यह खुद स्वीकार कर रहे हैं कि सत्र के दौरान उठाए गए सवालों पर मंत्री नदारद थे, तो इसका साफ अर्थ है कि रांची जिला प्रशासन और पुलिस महकमा गलत दिशा में काम कर रहा है। मरांडी ने दोटूक शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी इन मुद्दों को विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर मजबूती से उठाएगी और छात्रों के संघर्ष में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब पत्रकार और मीडियाकर्मी किसी संवेदनशील मुद्दे को जनता के सामने लाने की कोशिश करते हैं या तीखे सवाल पूछते हैं, तो उन्हें जबरन हिरासत में ले लिया जाता है या फिर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार अपनी विफलताओं और सच को जनता की नजरों से छुपाना चाहती है।
सीबीआई जांच की मांग: छात्र और विपक्षी दल लगातार जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं।
गिरफ्तारी और कार्रवाई: आंदोलन के दौरान कई नेताओं और प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है।
विपक्ष का समर्थन: भारतीय जनता पार्टी (BJP) समेत अन्य विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे युवाओं के हक की इस लड़ाई में हर स्तर पर उनका समर्थन जारी रखेंगे।
राज्य के युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है और वे पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाती है और छात्रों के गुस्से को शांत करने के लिए क्या रुख अपनाती है।