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जीतन राम मांझी ने देश में आरक्षण को बताया माथे पर कंलक, बोले- इसे खत्म करना जरूरी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने देश में आरक्षण को माथे पर कंलक बताया है। उनका कहना है कि हमें यह भीख के रूप में मिला था, अब इसे खत्म करने की जरूरत है।

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Oct 21, 2021
jitan ram manjhi says reservation is stigma, need to eliminate it

नई दिल्ली। भारत की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहा है। इस मुद्दे पर हर पार्टी की अपनी राय है, वहीं पार्टियां इसे अपनी जरूरत और अवसर के हिसाब से उठाती रहती हैं। अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने आरक्षण को खत्म करने की वकालत कर दी है। उन्होंने आरक्षण को देश के माथे पर कलंक करार दिया है और इसे जल्द ही खत्म करने की मांग की है। नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मांझी ने आरक्षण पर अपनी राय दी है।

हमसे चिपक गया है आरक्षण का कलंक
जीतन राम मांझी का कहना है कि आरक्षण का कलंक हमारे साथ चिपक गया है और यह किसी भीख से कम नहीं है। आज आरक्षण और जातिवाद का राक्षस हमें निगल रहा है, ऐसे में समान स्कूली शिक्षा ही इसका उपाय है। बिहार पूर्व सीएम का मानना है कि अगर देश में कॉमन स्कूलिंग सिस्टम लागू हो जाए तो 10 साल बाद आरक्षण की जरूरत ही नहीं होगी।

आरक्षण में देश में बनाई खाईं
मांझी का कहना है कि आरक्षण ने देश में लोगों के बीच एक गहरी खाईं बना दी है। ऐसे में जरूरी है कि राष्ट्रपति या फिर किसान के बच्चा दोनों एक ही स्कूल में पढ़ें। मुझे विश्वास है कि इस व्यवस्था के लागू होने के 10 साल बाद ही देश में आरक्षण और जातिवाद की कोई बात ही नहीं होगी।

उन्होंने फ्रांस, कनाडा, जापान, इंग्लैंड के स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों में समान स्कूली शिक्षा की व्यवस्था है। यही वजह है कि वहां आरक्षण और जातिवाद नहीं है। इस दौरान मांझी ने डॉ. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भी 10 या 20 साल के लिए आरक्षण की मांग की थी। बाबा साहेब ने कहा था कि इस अवधि के बाद स्थिति की समीक्षा के बाद ही आगे इस संबंध में फैसला लिया जाए। हमें आरक्षण नहीं चाहिए था यह हमको भीख की तरह मिला।

Published on:
21 Oct 2021 07:25 pm
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