
JPSC Exam Controversy: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवाल अब केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बेरोजगार युवाओं का आक्रोश सड़कों पर उतर चुका है और यह आंदोलन भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध नियुक्ति तथा जवाबदेही की मांग का प्रतीक बन गया है। रांची में चल रही भूख हड़ताल ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अब उनके पास न्याय की लड़ाई लड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद के बीच राज्य सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि मौजूदा मामला पेपर लीक का नहीं, बल्कि कथित बैकडोर नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि जिन संस्थाओं या एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया का संचालन किया, प्रश्नपत्र तैयार किए या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में भूमिका निभाई, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार दोनों इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि योग्य और मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा हो तथा दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में महान हॉकी खिलाड़ी और राजनेता जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा के नीचे 30 वर्षीय ब्रह्मानंद कुमार महतो पतली चटाई पर लेटे हुए हैं। बीते चार दिनों से उन्होंने अपने कपड़े तक नहीं बदले हैं। चार दिनों से लगातार हो रही बारिश, पसीने और कीचड़ के धब्बों के बीच उनका शरीर कमजोर जरूर पड़ चुका है, लेकिन उनका इरादा चट्टान की तरह मजबूत है।
बॉटनी में पीएचडी (PhD) कर चुके और पूरे शैक्षणिक करियर में फर्स्ट डिवीजन हासिल करने वाले ब्रह्मानंद ने इस आंदोलन में शामिल होने के लिए सेंट्रल सिल्क बोर्ड की अपनी सरकारी संविदा नौकरी तक छोड़ दी। साल 2023 में JSSC कीटपालक परीक्षा पास करने वाले 150 उम्मीदवारों में से ब्रह्मानंद भी एक थे, लेकिन 30 उम्मीदवारों की नियुक्ति बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अधर में लटका दी गई। थक-हारकर नवंबर 2025 में ये अभ्यर्थी झारखंड हाईकोर्ट पहुंचे, जहां मामला अब भी विचाराधीन है। ब्रह्मानंद कहते हैं
"मुझे नहीं पता था कि अनशन कैसे किया जाता है। मैं बस आया, लेट गया और विरोध शुरू कर दिया। न्याय मिलने तक मैं पीछे नहीं हटूंगा।"
हाल ही में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा घोषित 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों के बाद असंतोष की आग और भड़क गई। मात्र 103 रिक्तियों के लिए 2,204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया, जबकि इस परीक्षा में करीब 3.5 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे हैं।
हालात बिगड़ने पर हेमंत सोरेन सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 16 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासनिक स्तर पर रांची के एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री आवास पर वार्ता का निमंत्रण भी दिया है। हालांकि, अभ्यर्थियों की मांग है कि केवल आश्वासन नहीं, ठोस कदम उठाए जाएं।