इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दोनों भाइयों की गिरफ्तारी पर पिता संजय सोनकर (55) ने अपने बेटों का बचाव करते हुए कहा कि उनके बच्चों का इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है। संजय ने कहा कि सागर तो चंद्रनाथ जी की परछाईं की तरह रहता था। उनके दफ्तर का हिसाब-किताब, लेन-देन सब वही संभालता था। जिस दिन हत्या हुई, उस दिन भी सागर चंद्रनाथ के साथ ही बीजेपी कार्यालय में मौजूद था। घटना की खबर मिलते ही वह बदहवास हालत में अस्पताल भागा था। मेरे मासूम बेटों को इस सियासी साजिश में महज बलि का बकरा बनाया जा रहा है।