5 अगस्त 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Bengal Politics: बागी TMC सांसदों पर ऋतब्रत बनर्जी ने दिया बयान, कहा- वे NCPI में हैं, NDA में नहीं

TMC rebel Muslim MPs NDA meeting West Bengal: टीएमसी से बगावत कर NCPI में शामिल हुए तीन मुस्लिम सांसदों के NDA बैठक में शामिल न होने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब उनके NDA से दूरी बनाए रखने और दल-बदल कानून के तहत संभावित कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
2 min read
Google source verification
Ritabrata Banerjee

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी (फोटो-IANS)

Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार टीएमसी के बागी सांसदों की चर्चा जोरो पर है। दरअसल, टीएमसी से बागी होकर NCPI में शामिल होने वाले तीन मुस्लिम सांसद एनडीए की बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। अटकलें लगाई जा रही है कि ये सांसद सदन में एनडीए का साथ नहीं देंगे। वहीं अब इस पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। 

ऋतब्रत बनर्जी ने बागी सांसदों को लेकर कहा कि उन्होंने शुरू से ही कहा है कि वे NDA की मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। वे NCPI में हैं, NDA में नहीं। वे मुख्यमंत्री की मीटिंग में शामिल हुए थे। जो तीन सांसद शामिल नहीं हुए, उनमें से मैंने थोड़ी देर पहले खलीलुर रहमान और अबू ताहिर खान से बात की, हम शुक्रवार को कोलकाता में मिलेंगे।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि मंगलवार को टीएमसी के बागी सांसद अबू ताहिर खान ने कहा था कि वह न तो बीजेपी में शामिल होंगे और न ही एनडीए में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा करना है।

उन्होंने कहा था कि हम ऐसे किसी भी विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे, जो मुसलमानों के हितों के खिलाफ हो। हम मुर्शिदाबाद से आते हैं और हमें यहां के मुसलमानों के हितों की रक्षा करनी है।

NDA की बैठक में शामिल नहीं हुए तीन मुस्लिम सांसद

बता दें कि एनडीए की बैठक में एनसीपीआई के सांसद भी शामिल हुए थे, लेकिन यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान शामिल नहीं हुए। इससे पहले भी वे एनडीए की बैठक का बहिष्कार कर चुके हैं। इसके बाद एनसीपीआई में अदरूनी मतभेद सामने आने गए हैं।

इतना ही नहीं अब टीएमसी के बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून की चिंता भी सतानी लगी है। दरअसल, किसी अलग हुए गुट को दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए मूल दल की कुल विधायी संख्या के कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।

लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के 20 सांसद अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हो गए। ऐसे में 28 लोकसभा सांसदों में से कम से कम 19 सांसदों का NCPI के साथ रहना जरूरी है। अगर तीनों सांसद NCPI से अलग होते हैं तो गुट की संख्या घटकर 17 रह जाएगी। इससे पूरे विभाजन की कानूनी स्थिति खतरे में पड़ सकती है और बागी सांसदों पर उपचुनाव का संकट भी मंडरा सकता है।