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मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, सीएसएएम, डीपफेक कंटेंट और ऑपरेटिंग सिस्टम को लेकर क्या कहा?

मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग ने डीपफेक वीडियो और ऑनलाइन कंटेंट से जुड़ी गड़बड़ियों पर माफी मांगी। कंपनी ने कुछ खास कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए भुगतान किए जाने की बात भी स्वीकार की। इस बीच मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों ने आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात कर मामले पर चर्चा की।
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भारत

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kamlesh sharma

Aug 05, 2026

Mark Zuckerberg

Mark Zuckerberg(ANI)

नई दिल्ली। मेटा (फेसबुक) के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम), डीपफेक कंटेंट और ऑपरेटिंग सिस्टम में एरर को लेकर भारत सरकार से माफी मांगी है। यह जानकारी सरकारी सूत्रों की ओर से दी गई। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मेटा को स्पष्ट कर दिया गया था कि वे मध्यस्थ की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते। वे ही तय करते हैं कि सामग्री किसे मिलेगी।

आईटी एक्ट के तहत सेफ हार्बर उन पर लागू नहीं होता। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ खास तरह की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। उन्होंने माफी मांगी और अपनी गलती पर खेद व्यक्त किया। इससे पहले सरकारी सूत्रों ने बताया था कि आईटी मंत्रालय ने मेटा समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा।

3 दिन का दिया था अल्टीमेटम

साथ ही, संसदीय समिति ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को कुछ समय के लिए ब्लॉक करने को लेकर मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से तीन दिनों के भीतर "बिना शर्त माफी" मांगने को कहा था। अगर मेटा तय समय-सीमा के अंदर ऐसा नहीं कर पाता है, तो भारत में उसे मिलने वाली "सेफ हार्बर प्रोटेक्शन" खत्म हो सकती है।

दिल्ली में मेटा प्रतिनिधिमंडल की उच्च-स्तरीय बैठक

प्रधानमंत्री का वीडियो गलत तरीके से हटाए जाने के मामले पर चर्चा करने के लिए मेटा के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। अधिकारियों ने मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन करने की जरूरत पर जोर दिया और प्लेटफॉर्म के कथित गलत इस्तेमाल की घटनाओं पर चिंता जताई, जिसमें प्रधानमंत्री की पोस्ट को मनमाने ढंग से हटाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को तुरंत हल करने की जरूरत है।

जानकारी के मुताबिक, मेटा और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनके पास पहले से ही कड़े इंटरनल नियम और फैक्ट-चेकिंग सिस्टम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके प्लेटफॉर्म का जान-बूझकर या जानकारी के साथ कोई गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाता।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए एक पत्र के में संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री के भाषण को हटाए जाने के मामले को बहुत गंभीरता से लिया। बताया जाता है कि यह वीडियो, जिसमें पीएम मोदी परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के मामलों पर सरकार की कार्रवाई के बारे में छात्रों और 'जेन जी' को संबोधित कर रहे थे,लगभग पांच से छह घंटे तक फेसबुक पर उपलब्ध नहीं था।