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‘बेटी कहती है घर चलो, लेकिन न्याय मिले बिना नहीं जाऊंगी’, झारखंड में नौकरी के अभ्यर्थियों का आंदोलन हुआ तेज

Jharkhand Protest: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षा में धांधली को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज। बारिश के बीच भूख हड़ताल पर बैठे युवा, रोती बच्ची को देख बिलखी मां बोली- इंसाफ लिए बिना घर नहीं जाऊंगी। पढ़ें पूरी खबर...
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Ranchi News Today, Hemant Soren, Babulal Marandi, JPSC Civil Services Exam

रांची में भूख हड़ताल पर बैठे नौकरी के अभ्यर्थी | X(@BjpShatrughan43)

JPSC-JSSC Protest:झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में हुई धांधली, पेपर लीक और रूकी हुई नियुक्तियों को लेकर राजधानी रांची में अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में इतनी तेज बारिश होने के बावजूद भी हजारों छात्र-छात्राएं अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हुए हैं। प्रदर्शन स्थल पर कई अभ्यर्थी पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, जिनमें से कुछ की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
इस आंदोलन के बीच एक भावुक कर देने वाली बात भी सामने आई, जहां एक महिला अभ्यर्थी अपनी ढाई साल की मासूम बेटी के साथ धरने पर बैठी है। रोती हुई बच्ची के बार-बार घर चलने की जिद करने पर मां अपने आंसू नहीं रोक सकी, लेकिन उसने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक वे धरना स्थल से पीछे नहीं हटेंगी।

10 साल से नौकरी का इंतजार और 4 दिनों से भूख हड़ताल

स्टेडियम में जयपाल सिंह मुंडा की प्रतिमा के नीचे रामगढ़ के 30 वर्षीय ब्रह्मानंद कुमार महतो लेटे हुए हैं। साइंस में पीएचडी कर चुके ब्रह्मानंद पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर हैं। भीगी हुई सफेद शर्ट और चेहरे पर थकान के बावजूद उनके इरादे बुलंद हैं। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि भूख हड़ताल कैसे होती है, वे बस हक मांगने यहां आकर बैठ गए और जब तक इंसाफ नहीं मिलता, पीछे नहीं हटेंगे।
वहीं धनबाद के 37 साल के मोहम्मद शमशेर आलम 10 साल पुराने कागजों का ढेरा लेकर बैठे हैं। उन्होंने 2016 में शिक्षक भर्ती की परीक्षा पास करने के बाद भी वे आज तक नियुक्ति पत्र के इंतजार में भटक रहे हैं।

3.5 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में, JPSC परीक्षा पर उठे सवाल

इस पूरे आंदोलन की मुख्य वजह हाल ही में घोषित हुए 14वीं JPSC (संयुक्त सिविल सेवा) के परीक्षा का रिजल्ट है। कुल 103 पदों के लिए करीब 3.5 लाख युवाओं ने परीक्षा दी थी, जिसमें से 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया है। परिणाम आते ही परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप लगने लगे। 'JSSC-JPSC भ्रष्टाचार मुक्त अभियान' के नाम से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब पूरे राज्य का सबसे बड़ा छात्र आंदोलन बन चुका है।

'यह सिर्फ एक नौकरी की नहीं, हक की लड़ाई है'

स्थानीय लोग और स्वयंसेवक प्रदर्शनकारियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कर रहे हैं। कानून की पढ़ाई कर चुकीं 32 वर्षीय अभ्यर्थी अर्चना कुमारी, जो दिन-रात आंदोलनकारियों को भोजन बांटने में जुटी हैं, कहती हैं कि यहां ऐसे कई छात्र हैं जिनके पास अगले वक्त के खाने तक के पैसे नहीं हैं, फिर भी वे लड़ रहें हैं। यह लड़ाई किसी एक नौकरी की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की है।

मामले पर राजनीति तेज, CBI जांच की मांग

छात्रों के बढ़ते गुस्से को देखते हुए राज्य की राजनीति भी पूरी तरह गरमा गई है। एक तरफ जहां नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों की मांगों का समर्थन किया और 14वीं JPSC परीक्षा को तुरंत रद्द करते हुए पूरे मामले की जांच CBI से कराने का बोला है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि उनकी सरकार युवाओं के साथ है और जांच एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं। सरकार के मुताबिक अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।