
Kapil Sibal on Nandigram Bypoll 2026: राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग और सरकार के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है। सिब्बल ने सवाल किया कि ऐसे फैसले आखिर कब तक चलते रहेंगे।
कपिल सिब्बल ने कहा कि 7 सितंबर को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों समेत अन्य जगहों पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों सीटों पर उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया।
उन्होंने बताया कि 13 सितंबर को संचिता प्रधान ने नंदीग्राम से और रबीउल आलम चौधरी ने रेजीनगर से नामांकन दाखिल किया था। सिब्बल के मुताबिक, नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान हैं जबकि भाजपा ने खासिरानी राठ को उम्मीदवार बनाया है। मिलन प्रधान को 18 सितंबर को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था।
इस गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए और कार्रवाई के समय पर आपत्ति जताई। वहीं, पुलिस के मुताबिक मिलन प्रधान के खिलाफ पुराने मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था और इसी आधार पर कार्रवाई की गई।
सिब्बल ने कहा कि 17 सितंबर की शाम चुनाव आयोग ने चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया। उन्होंने चुनाव की घोषणा के बाद ऐसा कदम उठाए जाने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा पहले ही हो चुकी थी। इसके बाद उम्मीदवारों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया। ऐसे में बीच में चुनाव चिह्न फ्रीज करना असामान्य है। सिब्बल ने कहा कि यह अलग से चर्चा का विषय है।
कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग और सरकार के बीच कथित जुगलबंदी का आरोप लगाया। उन्होंने लोकतंत्र पर हमले और सरकार के कथित एकतरफा फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर के फैसलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सिब्बल ने पूछा कि ऐसे फैसले आखिर कब तक जारी रहेंगे।
सिब्बल ने कहा कि पूरा देश इन घटनाओं को देख रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि इससे ऐसा लगता है कि लोकतंत्र और संस्थाएं कमजोर हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव की घोषणा के बाद चुनाव चिह्न से जुड़ा फैसला कई सवाल खड़े करता है। सिब्बल ने कहा कि इस मामले पर अलग से चर्चा की जाएगी।