
Kapil Sibal on SIR: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि बिना किसी सबूत के किसका वोट हटाना है और किसका नहीं, यह फैसला कौन करेगा। कपिल सिब्बल ने कहा कि क्या चुनाव आयोग तय करेगा कि किसका वोट हटेगा और किसका नहीं? उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भूमिका पर भी सवाल उठाया है।
सिब्बल ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि BLO के पास किसी मतदाता का नाम हटाने का फैसला लेने का अधिकार है। अगर ऐसा कोई फैसला लिया जा रहा है तो यह स्पष्ट है कि इसकी मंजूरी चुनाव आयोग की ओर से आई होगी। उन्होंने चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी टिप्पणी की। सिब्बल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार इन दिनों Gen Z से काफी जुड़े नजर आ रहे हैं।
कपिल सिब्बल ने कहा कि SIR शुरू होने के समय ही उन्होंने और उनकी पार्टी ने इसका विरोध किया था। उनका कहना है कि जिस तरीके से यह पूरी प्रक्रिया की जा रही थी, उससे उन्हें चुनाव में हेरफेर की आशंका हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा लग रहा था कि सरकार और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत से यह प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सिब्बल ने कहा कि अब लोगों का वोट देने का अधिकार प्रभावित हुआ है।
सिब्बल ने SIR के तहत तय किए गए मामलों के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अब तक 82,782 मामलों का फैसला हुआ है। इनमें से 75,443 लोगों के नाम गलत तरीके से हटा दिए गए। यानी जिन मामलों का फैसला हुआ, उनमें करीब 91 फीसदी नाम गलत तरीके से हटाए जाने का दावा किया गया है। सिब्बल ने कहा कि यह आंकड़ा उनकी पहले जताई गई आशंका को सही साबित करता है।
सिब्बल ने SIR के तीसरे चरण का जिक्र करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से सामने आ रहे आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर दिल्ली का आंकड़ा बताया। उनके मुताबिक, दिल्ली में अब तक करीब 1.45 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब का भी जिक्र किया। सिब्बल ने दावा किया कि वहां करीब 20 लाख मतदाताओं को मृत बताया गया है।
कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि अगर लाखों और करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाते हैं तो फिर चुनाव का क्या मतलब रह जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले पर देश के लोगों को सवाल उठाना चाहिए। सिब्बल ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अभियान चलाने की जरूरत है।