
ब्रह्मपुत्र नदी। (फाइल फोटो- ANI)
नेपाल में भोटे कोशी नदी का पानी अचानक उफान पर आ गया। तिब्बत से आई तेज धार ने पुलों को बहा दिया है। बिजली प्लांटों को भी बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा है। कोई गांव जलमग्न हो गए हैं।
काठमांडू के उत्तर के जिलों में तबाही मची है। कई लोग बाढ़ के बाद लापता हैं। इसी तरह बिहार में कोसी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। लाखों लोगों की जान दांव पर है।
असम में भी कुछ दिनों पहले बाढ़ का खतरनाक मंजर देखने को मिला। ब्रह्मपुत्र नदी उफान पर आई और बाढ़ से राज्य में पचास से ज्यादा मौतें हुईं और सात लाख लोग बेघर हो गए।
रॉयटर्स ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि ये सिर्फ मौसम का खेल नहीं। चीन का तिब्बत और आसपास के इलाकों में बांध बनाने का तेज कार्यक्रम समस्या बढ़ा रहा है। माना जा रहा है कि बांध की वजह से ही भारत और नेपाल में बाढ़ की भयंकर स्थिति बन रही है।
विशेषज्ञों ने आगे बताया कि चीन ने तिब्बत में कई बड़े बांध पहले ही बना लिए हैं। यारलुंग त्सांगपो नदी पर (भारत में ब्रह्मपुत्र नदी) जांगमू बांध 2015 में पूरा हुआ। उसके बाद जिएक्सू और जियाचा बांध भी आ गए। ये सब ऊर्जा सुरक्षा के लिए हैं। लेकिन सबसे विवादित योजना मेडोग काउंटी में सुपर बांध की है।
यहां नदी भारत में आने से पहले बड़ा मोड़ लेती है। ये बांध तीन गॉर्जेस बांध से तीन गुना बिजली पैदा कर सकता है। क्षमता करीब 60 हजार मेगावाट बताई जा रही है।
लागत एक ट्रिलियन येन यानी करीब 148 अरब डॉलर के आसपास है। तीन गॉर्जेस बांध अभी दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत स्टेशन है। उसकी क्षमता 22 हजार 500 मेगावाट है। लेकिन मेडोग वाला बांध उससे भी बड़ा होगा।
ये इलाका दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में आता है। भारतीय और यूरेशियन प्लेटें यहां टकराती रहती हैं। इसलिए हिमालय में अक्सर भूकंप आते हैं। जनवरी 2025 में तिब्बती पठार पर आए भूकंप ने भारी नुकसान किया।
पांच जलविद्युत बांधों में दरारें पड़ गईं। 120 से ज्यादा लोग मारे गए। स्टॉकहोम स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंट पॉलिसी की 2026 रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ये योजना भूकंपीय दृष्टि से बहुत जोखिम भरी है। बांध टूटने या अचानक पानी छोड़ने से भारत और बांग्लादेश के इलाके तबाह हो सकते हैं।
चीनी वैज्ञानिकों के अध्ययन भी यही बताते हैं कि यहां सुरंग बनाने, अस्थिर मिट्टी संभालने और भूकंप के खतरे कम करने में बड़ी चुनौतियां हैं। जलाशय से प्रेरित भूकंप का खतरा भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Updated on:
26 Aug 2026 07:06 pm
Published on:
26 Aug 2026 07:06 pm
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