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Karnataka ED Raid: कर्नाटक में ED पर सियासी संग्राम तेज! DK शिवकुमार के दावे पर BJP का पलटवार, बोले- ‘नाम पता हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?’

Karnataka Politics: कर्नाटक में ED की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री के बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन मंत्रियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर दी है, जिन पर जांच एजेंसी की नजर होने की बात कही जा रही है।
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Karnataka ED Raid
Karnataka ED Raid :शिवकुमार के बयान से कर्नाटक में मचा सियासी भूचाल (फोटो सोर्स: ANI)

DK Shivakumar ED: कर्नाटक की राजनीति में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को लेकर नया घमासान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के इस दावे ने विवाद को और हवा दे दी है कि आने वाले दिनों में तीन-चार और मंत्री जांच एजेंसी के निशाने पर आ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने हालिया छापेमारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया, तो बीजेपी ने इसी बयान को पकड़कर पलटवार किया। सवाल उठाया जा रहा है कि अगर सरकार को संभावित कार्रवाई और संबंधित नेताओं के बारे में जानकारी है, तो वह खुद कदम क्यों नहीं उठाती?

Karnataka ED Raid: ED छापों पर शिवकुमार का बड़ा दावा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र की बीजेपी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कांग्रेस नेताओं पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि करीब 40 कांग्रेस विधायक और मंत्री ED की निगरानी में आ सकते हैं। मुख्यमंत्री ने पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को सतर्क रहने की सलाह भी दी।

यह बयान ऐसे समय आया है जब लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली से जुड़े परिसरों पर ED की तलाशी की कार्रवाई चर्चा में है। शिवकुमार ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए जारकीहोली का बचाव किया। उनका कहना है कि मंत्री वरिष्ठ नेता हैं और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं।

BJP ने CM से ही मांग लिया जवाब

शिवकुमार के बयान के बाद बीजेपी विधायक अरविंद बेलाड ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधा। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री को पता है कि कुछ मंत्री अवैध संपत्ति जमा कर रहे हैं, तो उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने में देरी नहीं करनी चाहिए। बीजेपी विधायक महेश तेंगिनकाई ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को उन चार मंत्रियों के नाम बता देने चाहिए, जिनके खिलाफ ED कार्रवाई की संभावना जताई गई है।

यानी बीजेपी अब शिवकुमार के दावे को ही कांग्रेस सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बना रही है।

‘कार्रवाई से डर नहीं, फर्जी आरोपों का विरोध’

शिवकुमार ने साफ किया कि कांग्रेस जांच से डरने वाली पार्टी नहीं है, लेकिन झूठे आरोपों और जनता को गुमराह करने वाली कहानियों का विरोध किया जाएगा। उन्होंने बीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों पर जांच की गति को लेकर भी सवाल उठाया। खास तौर पर भोवी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से संबंधित मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने जांच में कथित असमानता का आरोप लगाया।

पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र के मामले का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ED और CBI कथित तौर पर रकम बरामद करने में सफल नहीं हुईं, जबकि राज्य की CID और CCB जांच में करीब 79 करोड़ रुपये की राशि बरामद हुई।

सतीश जारकीहोली मामले में विदेश कारोबार का मुद्दा

ED की कार्रवाई को कथित FEMA उल्लंघन से जोड़कर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि भारतीय नागरिकों को विदेशों में कानूनी तरीके से निवेश और कारोबार करने की अनुमति है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों का विदेश में कारोबार होना अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी का समय ऐसा चुना गया जिससे सरकार के 100 दिन पूरे होने के कार्यक्रम से जनता का ध्यान हटे। वहीं, बीजेपी के हमले ने मामले को जांच एजेंसी बनाम सरकार के विवाद से आगे बढ़ाकर ‘क्या CM को पहले से पता है?’ वाले राजनीतिक सवाल में बदल दिया है।

Updated on:
14 Sept 2026 09:52 am
Published on:
14 Sept 2026 09:50 am