
CM DK Shivakumar On Portfolio Allocation Row: मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार को अभी सिर्फ एक सप्ताह हुआ है, लेकिन विभागों के बंटवारे को लेकर अंदरुनी असंतोष और खींचतान खुलकर सामने आ गई है। मंत्रियों में विभागों से नाराजगी है, वहीं दूसरे चरण के कैबिनेट विस्तार को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बुधवार को नई दिल्ली जाएंगे। वे वहां कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर विभागों के बंटवारे, कैबिनेट विस्तार और अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
वर्तमान में सरकार में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित कुल 14 मंत्री हैं। कई वरिष्ठ मंत्री अपने दिए गए विभागों से खुश नहीं हैं। खासतौर पर बेंगलूरु विकास मंत्री कृष्ण बैरे गौड़ा ने स्पष्ट कहा है कि बिना बेंगलूरु मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और बेंगलूरु विकास प्राधिकरण के बिना वे विभाग का प्रभार नहीं संभालेंगे। विधायक रिजवान अरशद भी मंत्रिपद की मांग को लेकर दिल्ली में सक्रिय लॉबिंग कर रहे हैं।
पहले चरण में शामिल न किए गए कई वरिष्ठ नेताओं को दूसरे चरण में जगह मिलने की उम्मीद है। इसको लेकर प्रदर्शन आदि से जोर आजमाइश की जा रही है। जमीर अहमद खान के समर्थकों ने पहले ही विरोध प्रदर्शन किया है। दलित संघर्ष समिति ने पूर्व मंत्री एचसी महादेवप्पा को कैबिनेट में शामिल करने की मांग को लेकर 16 जून को राज्य स्तर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस सरकार के भीतर जारी खींचतान को लेकर भाजपा ने एक बार फिर निशाना साधा है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा सांसद बसवराज बोम्मई ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक पिछले दो वर्षों से राजनीतिक अस्थिरता और अंदरूनी असंतोष की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस सरकार के भीतर चल रहे मतभेदों का असर प्रशासनिक कामकाज और जनकल्याण योजनाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। बोम्मई ने कहा कि भले ही कांग्रेस नेतृत्व में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया ऊपर से सहज नजर आ रही हो, लेकिन पार्टी के भीतर तनाव अभी भी बरकरार है।
उन्होंने इसे 'धधकते अंगारों' से तुलना करते हुए कहा कि अंदरूनी विवाद खत्म नहीं हुए हैं। भाजपा सांसद ने हाल ही में मंत्रिमंडल विभागों के बंटवारे को लेकर पैदा हुई स्थिति का जिक्र करते हुए दावा किया कि इससे कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान उजागर हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के कई विधायक और मंत्री न तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व को पूरी तरह स्वीकार कर रहे हैं और न ही उपमुख्यमंत्री जी.परमेश्वर के नेतृत्व पर एकमत हैं। बोम्मई ने मंत्री पदों को लेकर बढ़ते दबाव और असंतोष पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कांग्रेस विधायकों के बीच यह धारणा बनती दिखाई दे रही है कि पार्टी के लिए 2028 के विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता हासिल करना आसान नहीं होगा।