
भाजपा नेता का फेसबुक अकाउंट ब्लॉक किए जाने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने बसावनगुड़ी पुलिस को निर्देश दिया कि वह मेटा प्लेटफॉर्म्स को बताए कि बीजेपी राज्य प्रवक्ता दिलीप टीएन का फेसबुक अकाउंट तुरंत बहाल किया जाए।
हालांकि, आदेश के साथ अदालत ने यह भी साफ कहा कि सांप्रदायिक झगड़े से जुड़े विवादित लिंक दोबारा न लगाएं जाएं। यह मामला बेंगलुरु के बसावनगुड़ी इलाके में अगस्त में हुई घटना से जुड़ा है।
मिलाद-उन-नबी के जुलूस के दौरान केआर रोड पर दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ युवाओं और जुलूस के प्रतिभागियों के बीच विवाद हुआ।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और आरोपियों के सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश मजिस्ट्रेट से लिया। दिलीप टीएन बीजेपी के कर्नाटक सोशल मीडिया समिति के सदस्य और राज्य टीवी मीडिया प्रवक्ता हैं।
दिलीप ने उस घटना का एक वीडियो शेयर किया था। उन्होंने खुद कोई भड़काऊ कैप्शन नहीं लिखा था और न ही कोई नया लिंक जोड़ा था। फिर भी उनका पेज, जिस पर डेढ़ लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, पूरे भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
जस्टिस सी.एम. पूनाचा की बेंच ने अंतरिम आदेश में कहा कि जांच अधिकारी मेटा और उसकी भारतीय कंपनी को सूचित करें कि याचिकाकर्ता के सोशल मीडिया अकाउंट बहाल किए जाएं। लेकिन 27 अगस्त के मजिस्ट्रेट आदेश वाले आपत्तिजनक लिंक किसी भी हाल में न लाए जाएं। अदालत ने मेटा प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भी जारी किया है और मामला 12 नवंबर को फिर सुनवाई के लिए रखा है।
इस मामले में दिलीप ने बताया कि उन्होंने वीडियो शेयर किया तो फेसबुक ने उसे हिंसा और उकसावे की नीति के तहत फ्लैग किया। उन्होंने खुद पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद चार दिन बाद पूरा पेज भारत में ब्लॉक हो गया।
उन्होंने मेटा की शिकायत प्रणाली में ईमेल भी किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वकील गिरिश भारद्वाज और विवेकानंद एन. ने अदालत में दलील दी कि दिलीप एफआईआर में आरोपी नहीं हैं। मजिस्ट्रेट के आदेश में उनका नाम नहीं है। सिर्फ एक रीशेयर किया गया वीडियो उनके पेज से जुड़ा था।
उन्होंने कहा कि गैर-आरोपी व्यक्ति का पूरा अकाउंट ब्लॉक करना गलत है। यह अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत है, जिसमें कई सुरक्षा उपाय हैं। पूरा अकाउंट बंद करना अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन है।