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विरोध-प्रदर्शन के दौरान छेड़छाड़ का आरोप, महिला पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

molestation allegations: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारी पर छेड़छाड़ का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को कठोर कार्रवाई से सुरक्षा देने का निर्देश दिया। जानिए अदालत में क्या दलीलें दी गईं।
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police officer molestation case

महिला पत्रकार की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुरक्षा का आदेश Photo Source@ANI

Supreme Court order: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान एक पुलिस अधिकारी द्वारा छेड़छाड़ का आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार को किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से सुरक्षा दी जाए। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने बताया कि पत्रकार की शिकायत पर कोई FIR दर्ज नहीं की गई, जबकि संबंधित पुलिस अधिकारी ने SC/ST एक्ट के तहत दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जयसिंह ने उन महिला पत्रकारों के लिए सुरक्षा की मांग की, जिन्हें बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

डराने-धमकाने का हथियार बन रही कानूनी प्रक्रिया

जयसिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल शिकायतकर्ताओं को डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने अदालत से मांग की कि जिन महिला पत्रकारों को बदले की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें भी सुरक्षा प्रदान की जाए। उनका तर्क था कि यदि शिकायत करने वालों पर ही कार्रवाई का डर मंडराता रहेगा, तो कोई भी अपनी बात खुलकर नहीं रख पाएगा।

CJI का आदेश, संबंधित पत्रकार को मिले संरक्षण

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने संबंधित पत्रकार को कठोर कार्रवाई से सुरक्षा देने का निर्देश दिया। इससे फिलहाल पत्रकार को बड़ी राहत मिली है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एक व्यापक (ब्लैंकेट) निर्देश जारी करने का विरोध किया और पुलिस का जवाब हलफनामे के रूप में दाखिल करने के लिए समय मांगा। साथ ही, उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि संबंधित पत्रकार को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा हर महिला पत्रकार को बिना किसी भेदभाव के नहीं दी जा सकती। उनकी इस टिप्पणी से साफ है कि अदालत ने राहत को केवल इसी मामले तक सीमित रखा है और सामान्य निर्देश जारी करने के पक्ष में नहीं है।

शिकायत पर FIR नहीं, उल्टे अधिकारी पहुंचे हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि पत्रकार की शिकायत पर अब तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। इसके उलट, संबंधित पुलिस अधिकारी ने SC/ST एक्ट के तहत दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यही बात पत्रकार के लिए चिंता का कारण बन गई।