
India AI Impact Summit 2026
India AI Mission Budget 2026: नई दिल्ली में आयोजित 'इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026' में वैश्विक प्रौद्योगिकी की नई बिसात बिछ चुकी है। समिट के मंच से भारत ने दुनिया को यह संदेश तो दे दिया कि वह वैश्विक एआई कंप्यूट और डेटा वर्कलोड का सबसे बड़ा केंद्र बनना चाहता है, लेकिन असली चिंता यह है कि क्या हम दूसरों की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) चलाने तक सीमित रहेंगे? एआई समिट की विस्तृत विश्लेषण रिपोर्ट और बजटीय आंकड़ों की पड़ताल से खुलासा हुआ है कि भारत तकनीक की इस ऐतिहासिक दौड़ में खुद के शक्तिशाली मॉडल बनाने के बजाय केवल 'होस्टिंग' और 'एग्जीक्यूशन' लेयर पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था में ताकत का बंटवारा तीन स्पष्ट परतों में बटा हुआ है:
अमेरिका इस स्टैक की हर परत पर हावी है। उसके पास क्लाउड दिग्गज, अग्रणी मॉडल लैब्स और एनवीडिया जैसी चिप डिजाइन कंपनियां हैं। दूसरी ओर, चीन ने सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता और अपने घरेलू एआई मॉडल खड़े करने पर खरबों डॉलर झोंक दिए हैं।
न्यू यॉर्क स्थित द न्यू स्कूल फॉर सोशल रिसर्च की शोधकर्ता संयमसिद्धा के विश्लेषण के अनुसार, भारत की ताकत ऐतिहासिक रूप से आईटी सेवाओं और कुशल कार्यबल में रही है। एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत उसके एआई प्लेटफॉर्म के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। 'स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2025' में भी भारत टैलेंट और एडॉप्शन में अमेरिका और चीन के ठीक पीछे है। मगर डेटा का इस्तेमाल करना और एआई की सप्लाई चेन पर नियंत्रण रखना दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
| एआई योजना / पहल | बजटीय आवंटन एवं स्थिति | रणनीति का संकेत |
| इंडियाएआई मिशन (2026-27) | बजट घटाकर ₹1,000 करोड़ (पिछले साल से आधा) | बुनियादी मॉडल विकास पर कम ध्यान |
| इंडियाएआई कंप्यूट कैपेसिटी | ₹10,371 करोड़ के कुल आवंटन में से ₹4,563 करोड़ | बुनियादी ढांचे और जीपीयू पर बड़ा खर्च |
| एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoEs) | ₹255 करोड़ आवंटित | आरएंडडी (R&D) के लिए अपर्याप्त |
| 2047 तक टैक्स हॉलिडे | बजट 2026 में विदेशी क्लाउड/डेटा सेंटर कंपनियों को 0% टैक्स | भारत को एआई होस्टिंग हब बनाना |
भारत का कुल R&D खर्च जीडीपी का महज 0.6 प्रतिशत है, जबकि विकसित देश 3 से 4 प्रतिशत खर्च करते हैं। उदाहरण के तौर पर, GPT-4 को ट्रेन करने में लगभग $78 मिलियन और जेमिनी अल्ट्रा पर $191 मिलियन का कंप्यूट खर्च आया था। भारत का कुल शोध बजट इस तरह के फ्रंटियर मॉडल तैयार करने के लिए बेहद नाकाफी साबित हो रहा है।
प्रतिभा के मामले में भारत दुनिया का नेतृत्व करता है, लेकिन इसका फायदा अमेरिकी दिग्गज उठा रहे हैं। टाइम मैगजीन की प्रतिष्ठित 'आर्किटेक्ट्स ऑफ एआई 2025' सूची में शामिल चेन्नई में जन्मे श्रीराम कृष्णन (वरिष्ठ व्हाइट हाउस नीति सलाहकार) और IIIT हैदराबाद के पूर्व छात्र करनदीप आनंद (सीईओ, Character.AI) इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। भारत का शीर्ष तकनीकी दिमाग विदेशी एआई एजेंडे को दिशा दे रहा है।
| AI लेयर | प्रमुख देश | मुख्य भूमिका | रणनीतिक महत्व |
|---|---|---|---|
| फाउंडेशन मॉडल लेयर | अमेरिका, चीन | उन्नत AI मॉडल का विकास और प्रशिक्षण | तकनीकी नेतृत्व और बौद्धिक संपदा |
| सेमीकंडक्टर लेयर | ताइवान, दक्षिण कोरिया | उन्नत चिप्स और मेमोरी चिप्स का निर्माण | AI कंप्यूटिंग की बुनियादी क्षमता |
| सर्विस एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लेयर | भारत | डेटा सेंटर, क्लाउड होस्टिंग, IT सेवाएँ और आउटसोर्सिंग | डिजिटल सेवाओं का विस्तार और परिचालन क्षमता |
| AI आत्मनिर्भरता की उभरती लेयर | भारत | स्वदेशी AI मॉडल, कंप्यूटिंग क्षमता और चिप निर्माण का विकास | तकनीकी संप्रभुता और उच्च मूल्यवर्धन |
नोट: यह वैश्विक AI वैल्यू चेन का एक सरलीकृत रणनीतिक वर्गीकरण है। सभी देश एक से अधिक लेयर में सक्रिय हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने निजी क्षेत्र को डेटा सेंटर में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। बजट 2026 में घोषित नीति के तहत भारत के डेटा सेंटरों का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को वर्ष 2047 तक 100% टैक्स छूट (टैक्स हॉलिडे) देने का प्रस्ताव है।
इसके जवाब में बड़े निवेश के ऐलान हुए हैं:
समिट के अंतिम दिन (20 फरवरी 2026) भारत ने अमेरिका के नेतृत्व वाले ऐतिहासिक 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत भारत क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने वाले 11 देशों के वैश्विक गठबंधन में शामिल हो गया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब भारत के 55% शेयर वाले पारंपरिक आईटी आउटसोर्सिंग मॉडल पर एआई एजेंट्स के कारण संकट मंडरा रहा है। गार्टनर का अनुमान है कि 2029 तक 80% ग्राहक सेवाएं एआई संभाल लेगा। भारतीय आईटी शेयर सूचकांकों में आई गिरावट इसी डर का परिणाम है।
ताइवान ने एडवांस्ड चिपमेकिंग का 'चोकपॉइंट' (नियंत्रण केंद्र) बनाकर खुद को दुनिया के लिए अपरिहार्य बना लिया है। डेटा सेंटर कहीं भी बनाए जा सकते हैं और टैक्स छूट दूसरे देश भी दे सकते हैं। यदि भारत को एआई की इस वैश्विक होड़ में केवल "डिजिटल मजदूर" या "डेटा होस्ट" बनकर नहीं रहना है, तो उसे अपनी रणनीतिक सोच बदलनी होगी।
हमें सिर्फ डेटा सेंटर और कंप्यूट किराए पर देने के बजाय अपने खुद के राष्ट्रीय एआई मॉडल, मजबूत शोध संस्थान और प्रतिभा को देश में रोके रखने वाली नीतियां बनानी होंगी। जैसे भारत ने Y2K क्रांति के दौरान आईटी आउटसोर्सिंग में परचम लहराया था, वैसा ही रुख एआई के दौर में दोहराया जा रहा हैलेकिन इस बार दांव बौद्धिक संपदा (IP) का है!
(लेखक: संयमसिद्धा, शोधकर्ता, द न्यू स्कूल फॉर सोशल रिसर्च, न्यूयॉर्क)
Updated on:
15 Oct 2026 02:00 pm
Published on:
15 Oct 2026 02:00 pm
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