Hijab Verdict: कर्नाटक में हिजाब से प्रतिबंध हटाने के फैसले पर बीजेपी विधायक यतनाल ने सिद्धारमैया सरकार पर तुष्टीकरण करने का आरोप लगाया है।
Hijab Controversy: कर्नाटक में हिजाब और धार्मिक पोशाक को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक बसनागौड़ा पाटिल यतनाल ने रविवार को विजयपुरा में सिद्धारमैया सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब की अनुमति देने के रुख को पूरी तरह से 'तुष्टीकरण की राजनीति' करार दिया। यतनाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब यह पूरा मामला देश की शीर्ष अदालत में लंबित है, तो ऐसे में सरकार का कोई भी नया आदेश सीधे तौर पर अदालत की अवमानना माना जा सकता है।
बीजेपी विधायक ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के अधीन है और अंतिम फैसला आने से पहले इस तरह का कदम केवल एक विशेष समुदाय को खुश करने के लिए उठाया जा रहा है। यतनाल ने आगे ऐलान किया कि अगर सरकार हिजाब को बढ़ावा देगी, तो वे भी चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने हिंदू माता-पिता और छात्रों से अपील की कि वे स्कूलों में तिलक लगाकर और भगवा शॉल पहनकर जाएं। उन्होंने साफ कहा कि स्कूल खुलने पर वे खुद छात्रों के बीच भगवा शॉल का वितरण करेंगे और देखेंगे कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है।
गौरतलब है कि इस विवाद की पृष्ठभूमि 14 मई को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा दिए गए उस स्पष्टीकरण से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने साल 2022 के प्रतिबंध वाले आदेश वापस लेने की बात कही थी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह साफ किया था कि नए नियमों के तहत केवल हिजाब ही नहीं, बल्कि जनेऊ, रुद्राक्ष और शिव माला जैसे सीमित पारंपरिक और धार्मिक प्रतीकों को भी 12वीं कक्षा तक की निर्धारित वर्दी के साथ पहनने की छूट होगी। इसके बावजूद, विपक्ष इसे पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और एकतरफा फैसला मान रहा है।
इस विवाद से अलग, बीजेपी विधायक यतनाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश से की गई आर्थिक और ऊर्जा बचत की अपीलों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध का माहौल और अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे कठिन समय में देश के हित के लिए नागरिकों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोना खरीदने से बचें और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करें, ताकि देश की विदेशी मुद्रा को सुरक्षित रखा जा सके।
बयान के आखिरी हिस्से में यतनाल ने राज्य के भीतर एक नए राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं को भी हवा दी। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे और प्रमुख हिंदू संगठनों से चर्चा करेंगे। यदि राज्य के हिंदू बहुल क्षेत्रों (जेसीबी बेल्ट) के लोग एकजुट होते हैं, तो वे एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन पर अंतिम फैसला ले सकते हैं जो सीधे तौर पर हिंदुओं के हितों की रक्षा करेगी।
इस पूरे मामले पर राज्य की कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच तलवारें खिंच गई हैं। जहां कांग्रेस इसे सभी धर्मों को समानता देने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करने वाला कदम बता रही है, वहीं भाजपा इसे बहुसंख्यक समाज की भावनाओं के खिलाफ और चुनावी फायदे के लिए उठाया गया कदम मान रही है।
इस खबर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि हिजाब विवाद के बहाने बसनागौड़ा पाटिल यतनाल कर्नाटक की राजनीति में खुद को एक प्रखर हिंदूवादी नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य में नई पार्टी बनाने और 'जेसीबी बेल्ट' के हिंदुओं को एकजुट करने का उनका बयान आगामी चुनावों के मद्देनजर सूबे की सियासत में नए समीकरण बना सकता है। (इनपुट: ANI)